जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: अपनी कवितायेँ

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    10. नारी

    दैनिक जागरण 10 जून 2006 उठ जाग ऐ नारी भारत कीमिट न पाए अब पहचान और भारत कीतू नकल पश्चिम की क्यों करती हैतू रंगरूप अपना क्यों बिगाड़ा करती हैजीन्स पैंटकमीज पहनें सिर मुंडवा करकेदिखाए खुद को जैकेट कोट हैट लगा करकेउठ जाग ऐ नारी भारत कीमिट न पाए अब पहचान और भारत कीतू शराब…

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    9. अखंड जोत जलाने दो

    दैनिक जागरण 25 मई 2006 विद्या, संस्कृति, साहित्य सृजन करने का,जीवन चुनौतियों का सामना करने का,त्याग, भक्ति, सेवा, बलिदान करने का,दिव्य शक्तियों का, सामर्थ्य का, योग्यता का,बोध करवाता है, विद्यालय कर्तव्य परायणता का,निष्पक्ष प्रकाशन, प्रसारण, प्रदर्शन करने वालो!उच्च जीवन, परिवार, समाज का पोषण करने वालो!ज्ञान-स्रोत हितैषी हैं वैदिक विद्या-मंदिर, उन्हें सक्रिय होने दो,अखण्ड जोत जलाते…

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    8. समर्थ की पहचान

    दैनिक जागरण 14 मई 2006 निर्बल असमर्थ ही छुपता बनता कायर हैबलवान समर्थ करता शूरता का कार्य हैरखता है ध्यान सदा अपने हर कर्म काछोड़ता है संग अपने हर दुष्कर्म काकरता सद्गुणों से जीवन का श्रृंगार हैदेखता जन का जन से होता प्यार हैमनवा जब तू करेगा पाप नहींतब बन पाएगा समर्थ कैसे आप नहीं

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    7. बुरा नहीं है

    दैनिक जागरण 29 मार्च 2006 अपनी बात काटने वाले सेकारण पूछ लेना अच्छाअपनी कमीं जानी जा सकेतो कोई बुरा नहीं हैबात स्पष्ट करने वाले कोअभय दान देना अच्छाकोई सच्चाई सामने आ जाएतो कोई बुरा नहीं हैअपनी बात कहने वाले कीजरूरत जान लेना अच्छाकोई अमूल्य जीवन संवर जाएतो कोई बुरा नहीं हैसभा में भाग लेने कोसमय…

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    6. समय

    दैनिक जागरण 28 मार्च 2006 क्या मैं समय का सदुपयोग कर रहा हूं?क्या मैं अपना भविष्य प्रकाशमय बना रहा हूं?विद्यार्थी हूं,मैं विद्या ग्रहण करता हूं क्या?समय है अनमोल,मैं विद्या-आचरण करता हूं क्या?विद्यार्थी जीवन में सीखना और जानना,क्या है निश्चय अपना?क्या पूरा होगा?जीवन का जो है निश्चित सपना,क्या मैं समय का मोल जानता हूं?क्या मैं समय…

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