श्रेणी: अपनी कवितायेँ
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8. गुरु का निरादर
दैनिक जागरण 16 मार्च 2007 जब मन कर्म वाणी सेमैं गुरु का अनादर करता हूंतब मैं उनसे सुस्नेह कीसयंमी होते हैं गुरु सदाकरते हैं शिष्य हित की बातमैं शिष्य हूं मन चलाकरता हूँ अपने मन की बातमन की बातों में रम करजब मैं गुरु को भूल जाता हूंखाता हूं तब ठोकरें दरदरगुरु से दूर हो…
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7. छात्रों की व्यथा
दैनिक जागरण 10 मार्च 2007हमें पर्चियां पहुंचा करपरीक्षा में नकल को न करो हवाअमूल्य जीवन भ्रष्ट हो जाएगाहमारी अयोग्यता को न करो हवानकल से परीक्षा में हम चाहे पास हो जाएंगेऐसे तो हम कभी योग्य नही बन पाएंगेआगे योग्य नागरिक तुम्हें मिलेंगे कैसेयोग्य डाक्टर इंजीनियर तुम्हें मिलेंगे कैसेहमारे इन अमूल्य जीवन पलों कोनकल की तुम…
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6. जागो धरती नन्दन
दैनिक जागरण 2 मार्च 2007 जागो धरती नन्दन हो रहा क्रंदन महान कांप रही धरती गिर न जाए आसमान पीडि़त राष्ट्र निज नेत्र खोल जरा त्रस्त मानवता रक्त रंजित हो धरा जमा और मुनाफाखोरों का लगा है मेला स्वार्थ सिद्धि का पड़ा है घेरा पल पल लाता कम्पन प्रभंजन जहान जागो धरती नन्दन हो रहा…
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5. भूजल संरक्षण
भूजल संरक्षण का हर जगह रखना है ध्यान पल पल इससे सबको मिलता है जीवन दान अब हमने युद्धस्तर पर करना है भूजल का संरक्षण भूजल स्तर ऊपर लाना है होगा इससे हर जीवन का संरक्षण नहीं करेंगे अब हम और अधिकधरती का चीरहरण चारों ओर हरियाली होगी होगा भूजल पुनर्भरण जल संरक्षण
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4. कहना है क्या
दैनिक जागरण 15 फरवरी 2007आत्म बोध प्राप्त करने कोआत्म चिन्तन करना अच्छाआत्म ज्ञान हो जाएतो कहना है क्याआत्म दर्शन करने कोआत्मावलोकन करना अच्छाआत्म साक्षात्कार हो जाएतो कहना है क्याआत्म विश्वास बढ़ाने कोकलात्मक प्रतियोगिताओं में भाग लेना अच्छाअपनी पहचान बन जाएतो कहना है क्यासंसार एक परिवार निहारने कोआध्यात्मिक दृष्टि अपना लेना अच्छाकोई सद्गुरु बन जाएतो कहना…