श्रेणी: विविधा
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
कभी-कभी
कभी-कभी ऐसा हो गया, भ्रम में अँधेरा, प्रकाश हो गया l अँधेरा तो अँधेरा ही रहा, पर मनः तू भ्रष्ट राही हो गया ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
उत्तम विद्या
ले लेना तू उत्तम विद्या नीच से, दूषित कुल से स्त्री रत्न l कह गया कोई संत प्यारा, मनः हर्ज नहीं करना ऐसा यत्न ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जाप सके तो
जाप सके तो जाप ले तू, ॐ ॐ हर साँस lफिर क्या जाप पायेगा, मनः निकल जाएगी तेरी हर साँस ll
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श्रेणी: अनमोल वचन
दुष्टों के उपद्रव
अनमोल वचन :-“जिस राजा के राज्य में दुष्टों के उपद्रव से सारी प्रजा त्रस्त रहती है उस मतवाले राजा की कीर्ति, आयु, ऐश्वर्य और प्रलोक नष्ट हो जाते हैं “।
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श्रेणी: अनमोल वचन
पात्र-अपात्र
अनमोल वचन :-सांपों को दूध पिलाना केवल उनके विष को बढ़ाता है, इसी प्रकार मूर्खों को दिया हुआ उपदेश उन्हें प्रकुपित ही करता है, न कि शांत । अतः हमें प्रत्येक कार्य में पात्र-अपात्र का अवश्य ही ध्यान रखना चाहिए ।