श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
बुरे दिन
गीदड़ की मौत आती है, उसे गाँव की राह भाती है lबुरे दिन आते हैं, मनः बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जीना-मरना
गिरती बूंद नदी में बह जाती है संग जलधार lजीना-मरना खेल है, मनः नहीं जीत, यहाँ न किसी की हार ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
दिल से दिल
रात काली कट जाती है, सूर्य ले आता है सवेरा lदिल से दिल मिलता है, मनः छंट जाता है गम का अन्धेरा ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
आग
तरह-तरह का जलना है, तरह-तरह की है आग lजिन्दा जलाती चिंता तुझको, मनः मुर्दा भस्म करती है आग ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
परिश्रम बिना
खोज जिसे होती है, मंजिल पा ही लेता है lपरिश्रम बिना जो ढूंढता है, मनः जीवन नष्ट कर लेता है ll