जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: मानव जीवन

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    सात्विक बुद्धि

    वेद और वैदिक ज्ञान के बिना मनुष्य जाति में सात्विक बुद्धि नहीं आ सकती l

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    भेंट देने के बाद

    कुछ मिलता है, भेंट देने के बाद lतोडना पड़ता है नाता, मनः भुलानी पड़ती है याद ll

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    2. देख सके तो

    दैनिक जागरण 8 जनवरी 2006 स्वामी सबका ईश्वर है प्राणी हैं अनेकजीवन सबका समान है देख सके तो मन से देखनारी सबकी जननी है माताएं हैं अनेकबच्चे सबके समान हैं देख सके तो मन से देखज्ञान जननी बुद्धि है मस्तिष्क हैं अनेकआत्म ज्ञान समान है देख सके तो मन से देखखून सबका लाल है विचार…

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    1. चेतना

    दैनिक जागरण 6 जनवरी 2006 सेवा जो कर न सकेवह तन है किस काम कानाम जो जाप न सकेवह मन है किस काम काकार्य जो सिद्ध कर न सकेवह धन है किस काम कासन्मार्ग जो दिखा न सकेवह ज्ञान है किस काम काजीवनरस जो भर न सकेवह धर्म है किस काम कामानवसृजन जो कर न…

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    6. दानवता का अहसास

    7 दिसम्बर 1996 कश्मीर टाइम्सहिंसा करता मैं धर्म के नाम पर,धर्म पशुता में अंतर रहा क्या?इंसान हूँ कहलाता मैं मगरबन गया पशु, अर्थ रहा क्या?बस एक इंसान हूँ मैं मगरभेड़िये की खाल में रहता क्यों?बातें धर्म की करता मैं मगरलहू बेगुनाहों का बहाता क्यों?हिंसा है धर्म दानव का,सबको मरने की रह दिखाई है,हिंसा करना है…

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