जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



लोकमान्य तिलक

विचारकों के कथन :-

शरीर को रोगी और निर्बल रखने के सामान दूसरा कोई पाप नहीं है।
- लोकमान्य तिलक