जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

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    7. भारतीय शिक्षा की परंपरा

    आलेख – दैनिक कश्मीर टाइम्स 9.8.1996 जिस प्रकार निवार से किसी लकड़ी की चारपाई को कलात्मक ढंग से बुनकर तैयार किया जाता है ठीक उसी प्रकार किसी देश का मानचित्र उसके अनुकूल उपयोगी शिक्षा पर निर्भर करता है l इस काम में अभिभावक, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और प्रशासकों के आपसी प्रेम, सहयोग त्याग और बलिदान की…

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    6. लार्ड मैकाले और भारतीय शिक्षा

    कश्मीर टाइम्स 4.8.1996इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि भारतीय परंपरागत जन उपयोगी शिक्षा-प्रणाली ने विश्व की विशाल धरती पर मानव समाज, स्थानीय भाषा, विद्या, कला, ज्ञान-विज्ञान, सभ्यता-संस्कृति और साहित्य सृजन, पोषण और उसका विकास किया l उसके सामने आई समस्या व्यक्तिगत विकास की रही हो या समाजिक. आर्थिक हो या राजनैतिक, सभ्यता, कला–सांस्कृतिक हो…

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    5. विदेशी शिक्षा से हमे क्या मिला ?

    कश्मीर टाइम्स 26 जुलाई 1996 भारत पराधीन हो गया l कारण था – उस समय के महत्वाकांक्षी, अहंकारी राजनीतिज्ञों का अपने गर्व में चूर रहकर छोटी-छोटी बातों के लिए मात्र अपने हित में बदले की भावना से एक दूसरे को नीचा दिखाने हेतु आपस में लड़ते रहना l स्थान-स्थान पर आचार्यों तथा विद्वानों का अपमान…

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    4. साधक मन और साधना

    आलेख – कश्मीर टाइम्स 9 जुलाई 1996 साधना-प्रगति के अंतिम बिंदु तक पहुँचने के लिए जो जिज्ञासु प्रयत्नशील रहता है, वह कभी थकने या रुकने का नाम नहीं लेता है – साधक कहलाता है l वह भली प्रकार जानता है कि साधना के मार्ग पर फूल कम और कांटे अधिक मिलते हैं l फिर भी…

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    1. सद्गुण संस्कार और हमारा दायित्व

    आलेख – मानव जीवन दर्शन असहाय समाज वर्ग जनवरी जून 1996 ईश्वर द्वारा रचित प्रकृति में पृथ्वी और उसके चारों ओर ब्रह्मांड बड़ा विचित्र है l सूर्य में ताप, चन्द्रमा में चांदनी, वायु में सरसराहट और नदियों में कल-कल के मधुर संगीत का मिश्रण इस बात का का द्योतक है कि समस्त ब्रह्मांड में जो…

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    2. लोक विकास – समस्या और समाधान

    आलेख – असहाय समाज वर्ग जनवरी जून 1996 इस सृष्टि की संरचना कब हुई ? कहना कठिन है l सृष्टि के रचयिता ने जहाँ प्रत्येक प्राणी को जीवित रहने के लिए आहार की व्यवस्था की है, वहां मनुष्य के जीवन से संबंधित हर पक्ष के साथ एक विपरीत पहलू भी जोड़ा है l जहाँ सुख…

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    5. देख सके मन से देख

    29 जून 1996 दैनिक कश्मीर टाइम्स स्वामी सबका ईश्वर है, प्राणी हैं अनेक, जीवन सबका समान है, देख सके तो मन से देख, नारी सबकी जननी है, माताएं हैं अनेक, बच्चे सबके समान हैं देख सके तो मन से देख,ज्ञान जननी बुद्धि है, मस्तिष्क हैं अनेक, आत्म – ज्ञान समान है, देख सके तो मन…

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    3. नींद त्यागो – राष्ट्र संभालो

    दैनिक कश्मीर टाइम्स 29 जून 1996 किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी अपनी सभ्यता और संस्कृति पर निर्भर करती है l कोई भी देशवासी विदेश में उसके अपने ही राष्ट्र की राष्ट्रीयता, भाषा, पहनावा, रहन-सहन, खाना, आचार- व्यवहार और स्वदेशी भावना से जाना तथा पहचाना जाता है l इसलिए राष्ट्र और उसकी राष्ट्रीयता से संबंधित…

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    4. शाख – शाख पर

    24 जून 1996 कश्मीर टाइम्सजिधर देखूं,उधर अजगर,इधर अजगर,उधर अजगर,आगे अजगर,पीछे अजगर,नीचे अजगर,ऊपर अजगर,अंदर अजगर,बाहर अजगर,छोटा अजगर,बड़ा अजगर,जिधर देखूं,उधर अजगर,अजगर ही अजगरहो जायेंगे जब हर शाख पर,बता चेतन चहकेंगे पंछी,कैसे? शाख शाख पर,

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    3. घृणा – फूट

    24 जून 1996 कश्मीर टाइम्सभड़कने नहीं देंगे, हम फिरघृणा-फूट की ज्वाला,अवरुध्द करेंगे, बढ़ती इसभयानक आंधी को,दुश्मनों का दिल तो हैपहले से ही काला,सीने पर लगने नहीं देंगे, अबकोई गोली किसी गांधी को,

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