जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

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    15. शिक्षा का विदेशीकरण

    दैनिक जागरण 24 सितम्बर 2006स्वदेशी शिक्षा का विदेशीकरण करने वालोस्वदेश की पहचान का अनादर करने वालोविदेशी कोई अनजाना स्वदेश आ जाएगाकरके मीठी बातें तुमसे भेद सारे ले जाएगाखुद तुम्हें घर से निकालेगा धक्के देकरबन जाएगा वह स्वामी तुम्हारा सर्वस्व लेकरतब बन जाओगे तुम उसके सामने क्याफिर कर पाओगे तुम अपने लिए क्या

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    14. सत्य आचरण

    दैनिक जागरण 16 सितम्बर 2006श्रेष्ठ साहित्य है कामधेनुदूध सम मिलती है शक्तिज्ञानी की बात ही छोड़ोमूर्ख भी करने लगता है भक्तिसद्ग्रंथ खोलो पढ़ लो जराजीवन कल्याण हो जाएगासत्य आचरण करते चलोजमाना सत्युग हो जाएगा

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    13. धरती मां

    दैनिक जागरण 15 जुलाई 2006धरती मां धरती मांतू है सबकी पालक पोषक धरती मांसर्दी गर्मी वर्षा सब सहती जातीमीठे कन्दमूल वनस्पति उपजातीफूलफल अन्न दालें खिलातीदेकर सकल पदार्थ घर बाहर भरती मांधरती मां धरती मांतू है सबकी पालक पोषक धरती मांऊंचे पहाड़ों से बनी तेरी छाती हैवन्य सम्पदा की तू ओढ़े साड़ी हैकल कल करते झरने…

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    12. प्रेरणा से

    दैनिक जागरण 8 जुलाई 2006मन की इच्छाएं बढ़ती जा रहींबुद्धि निर्णय लेने में हो गई असमर्थइद्रियां पथभ्रष्ट होती जा रहीहृदय विशालता का नहीं कोई रहा अर्थसमाज बंट गया धर्म जाति वर्ग वादविवादों मेंघिर गया ऊंचनीच भेदभाव की दीवारों मेंविकासशील जीवन यात्रा तोड़ रही दमविकृत समाज व्यथा हो रही न कमहे विचारशील स्थिर मन और इद्रिय…

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    11. ज्ञान और शक्ति

    दैनिक जागरण 21 जून 2006है बिन ज्ञान के शक्ति अंधीसमस्याएं करती है जटिल पैदाशक्ति बिना है ज्ञान अपाहिजकुछ ही होता है मुश्किल पैदाज्ञान और शक्ति मिलाकरजब किया जाता है कामसफलता की जय होती हैकर्ता को भी मिलता है इनामधार चढ़ी नहीं जिस तलवारवह है तलवार कह सकता है कौनशक्ति लिए अपार व साथ अज्ञान भीमनवा…

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    10. नारी

    दैनिक जागरण 10 जून 2006 उठ जाग ऐ नारी भारत कीमिट न पाए अब पहचान और भारत कीतू नकल पश्चिम की क्यों करती हैतू रंगरूप अपना क्यों बिगाड़ा करती हैजीन्स पैंटकमीज पहनें सिर मुंडवा करकेदिखाए खुद को जैकेट कोट हैट लगा करकेउठ जाग ऐ नारी भारत कीमिट न पाए अब पहचान और भारत कीतू शराब…

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    9. अखंड जोत जलाने दो

    दैनिक जागरण 25 मई 2006 विद्या, संस्कृति, साहित्य सृजन करने का,जीवन चुनौतियों का सामना करने का,त्याग, भक्ति, सेवा, बलिदान करने का,दिव्य शक्तियों का, सामर्थ्य का, योग्यता का,बोध करवाता है, विद्यालय कर्तव्य परायणता का,निष्पक्ष प्रकाशन, प्रसारण, प्रदर्शन करने वालो!उच्च जीवन, परिवार, समाज का पोषण करने वालो!ज्ञान-स्रोत हितैषी हैं वैदिक विद्या-मंदिर, उन्हें सक्रिय होने दो,अखण्ड जोत जलाते…

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    1. जल धारा कराती है शिवलिंगों को स्नान

    आलेख – दैनिक जागरण 17.5.2006 देव भूमि हिमाचल प्रदेश में – सुल्याली गाँव तहसील नूरपुर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है l इसी गाँव में एक कंगर नाला के ठीक उस पर, स्वयम प्रकट हुए आप अनादिनाथ शिव शंकर-भोले नाथ शम्भू जी का प्राचीन मंदिर है जो स्वयं निर्मित एक ठोस पहाड़ी…

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    8. समर्थ की पहचान

    दैनिक जागरण 14 मई 2006 निर्बल असमर्थ ही छुपता बनता कायर हैबलवान समर्थ करता शूरता का कार्य हैरखता है ध्यान सदा अपने हर कर्म काछोड़ता है संग अपने हर दुष्कर्म काकरता सद्गुणों से जीवन का श्रृंगार हैदेखता जन का जन से होता प्यार हैमनवा जब तू करेगा पाप नहींतब बन पाएगा समर्थ कैसे आप नहीं

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    7. बुरा नहीं है

    दैनिक जागरण 29 मार्च 2006 अपनी बात काटने वाले सेकारण पूछ लेना अच्छाअपनी कमीं जानी जा सकेतो कोई बुरा नहीं हैबात स्पष्ट करने वाले कोअभय दान देना अच्छाकोई सच्चाई सामने आ जाएतो कोई बुरा नहीं हैअपनी बात कहने वाले कीजरूरत जान लेना अच्छाकोई अमूल्य जीवन संवर जाएतो कोई बुरा नहीं हैसभा में भाग लेने कोसमय…

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