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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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8. विद्यार्थी जीवन विकास
10 अक्तूबर 2007 दैनिक जागरण खरबूजा खरबूजे को देख कर अपना रंग बदलता है – कहावत विश्व विख्यात है। परिवार में बच्चे और विद्यालय में विद्यार्थी आस-पड़ोस में जैसा देखते व सुनते हैं, वे स्वयं वैसा करने का प्रयत्न भी करते हैं। उन्हें वहां उत्तम संस्कार मिलें इसलिए माता-पिता और गुरु जन घर अथवा विद्यालय…
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7. हमारी राष्ट्रीय भाषा
9 अक्तूबर 2007 दैनिक जागरणयह सत्य है कि हमारे देश के लोग, उनका रहन-सहन, खान-पान, आचार-व्यवहार, राष्ट्रीय भौगोलिक स्थिति, जलवायु और उत्पादन से देश की सभ्यता और संस्कृति को बल मिलता है। उससे भारत की पहचान होती है। अगर कभी इसमें विद्यमान गुण व दोशों को समाज के सम्मुख अलिखित रूप में व्यक्त करना पड़े…
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6. विद्यार्थी जीवन आदर्श
25 सितम्बर 2007 दैनिक जागरणअगर कोई स्थानीय व्यक्ति अच्छा खाता-पीता, सोता है और उसके बारे में लोग कहें कि उसका जीवन सर्वश्रेष्ठ है तो एक विद्यार्थी भी उनकी हां में हां मिलाए क्या? नहीं, वह जानता है कि सुखी जीना मात्र खाने-पीने, सोने तक ही सीमित नहीं है बल्कि वह जीवन की एक कला है।…
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5. कर्तव्य विमुखता का काला साया
आलेख – सामाजिक चेतना दैनिक जागरण 6 सितंबर 2007 आज बुराई का प्रतिरोध करने वाला हमारे बीच समाज में कोई एक भी साहसी, वीर, पराक्रमी, बेटा, जन नायक, योद्धा अथवा सिंहनाद करने वाला शेर नौजवान दिखाई नहीं दे रहा है l मानों जननियों ने ऐसे शेरों को पैदा करना छोड़ दिया है l गुरुजन योद्धाओं…
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4. “विद्यार्थी जीवन कल्याण मंच”
दैनिक जागरण 2.9.2007 प्राचीन काल की तरह माता-पिता व गुरुजनों को आज मात्र स्वयं ही को नहीं जगाना है बल्कि स्वयं जागकर बाल, विद्यार्थी, स्नातक और युवा वर्ग को भी जगाना है l वे अब भी स्वयं और परहित के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं l उनमें लौकिक एवं अलौकिक कार्य कर सकने की…
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1. जय राष्ट्रीय निशान
मातृवन्दना अगस्त 2007 जय राष्ट्रीय निशानरहे सदा तेरी पहचानकेसरिया वीरता उत्साह त्याग का सूचकआन शान मान का पूजकनहीं था तू अनादर करने के योग्यजलते देखते हैं यहां वहां हमारे प्राणजय राष्ट्रीय निशानश्वेत सत्य पवित्रता शांति का प्रतीकनहीं है आज यहां सब दिखता ठीकगए कहां गुरु देते थे जो हमें सीखकर्तव्य अपना भूल गए होता नहीं…
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3. जनहित विरोधी मानसिकता
25 अगस्त 2007 दैनिक जागरण सामाजिक जन चेतना “भारत देश महान” जैसी बातें अब नीरस और खोखली लगने लगी हैं l मन्दिर समान पवित्र घर और विद्यालयों में जहाँ कभी ज्ञान, श्रद्धा, प्रेम-भक्ति और विश्वास पाया जाता था, वहां पर अज्ञान, अश्रद्धा, अवज्ञा, अविश्वास होने के साथ-साथ अवैध संबंध, भ्रूण हत्याएं, बात-बात पर वाद-विवाद, मार-पीट, मन-मुटाव,…
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2. जय भारत देश महान
आलेख – राष्ट्रीय भावना दैनिक जागरण 18 अगस्त 2007 वह भारत का स्वर्णयुग ही था जब देश का कोई भी नौजवान अपने बल, साहस, सुझबुझ और विद्या-ज्ञान आदि गुणों से सदैव परिपूर्ण रहता था l इसी कारण वह स्थानीय क्षेत्र से बढ़कर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और समस्त विश्व स्तर पर भी पहुँच जाता था l वहां…
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1. आस्था की दहलीज
आलेख – धर्म अध्यात्म संस्कृति दैनिक जागरण 1.8.2007 हमारे देश में ऐसे अनेकों धार्मिक व तीर्थ स्थल हैं जिनके साथ हमारी पवित्र आस्थाएं जुड़ी हुई हैं l हम वहां अपनी किसी न किसी कामना सहित देव दर्शनार्थ जाते हैं और अपनी कामना पूरी होने पर उन्हें श्रद्धा सुमन भी अर्पित करते हैं l इससे हमें…
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19. पानी को बचाएं
दैनिक जागरण 15 जून 2007 पानी लेकर बंद करना है नलभाई यों ही व्यर्थ नहीं बहाना है जलसब्जी या फलों को धोकरक्यारी में डाल देना है पानीक्यारी में नमी रहेगीनाली में नहीं जाने देना है पानीशेष बचा बोतल या बाल्टी का पानीहै क्यारी के पौधों का पानीकल के लिए ढक करआज रखना है पेयजलसंभलकर कल…