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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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6. कब तक होती रहेगी राजभाषा की अनदेखी
आलेख – संस्मरण कश्मीर टाइम्स 9.11.2008क्या हिंदी “हिन्द की राजभाषा” को व्यवहारिक रूप में जन साधारण तक पहुँचाने में कोई बाधा आ रही है ? अगर हाँ तो हम उसे दूर करने में क्या प्रयास कर रहे हैं ? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढना ज्यादा जरूरी है lमुझे भली प्रकार याद है, दिनाक 29 फरवरी…
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3. सार्थक दीपावली
26 अक्तूबर 2008 कश्मीर टाइम्सनगर देखो! सबने दीप जलाए हैं द्वार-द्वार पर,घर आने की तेरी ख़ुशी में मेरे राम!तुम आओगे कब? मेरे मन मंदिर,अँधेरा मिटाने मेरे राम!आशा और तृष्णा ने घेरा है मुझको,स्वार्थ और घृणा ने दबोचा है मुझको,सीता को मुक्ति दिलाने वाले राम!विकारों की पाश काटने वाले राम !दीप बनकर मैं जलना चाहूँ,दीप तो…
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5. हमारी हिन्दी भाषा
12 अक्तूबर 2008 कश्मीर टाइम्सयह सत्य है कि हमारे देश के लोग, उनका रहन-सहन, खान-पान, आचार-व्यवहार, राष्टीय भौगोलिक स्थिति, जलवायु और उत्पादन से देश की सभ्यता और संस्कृति को बल मिलता है। उससे भारत की पहचान होती है। अगर कभी इसमें विद्यमान गुण व दोषों को समाज के सम्मुख अलिखित रूप में व्यक्त करना पड़े…
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2. राजभाषा हिंदी
5 अक्तूबर 2008 कश्मीर टाइम्समेरे मन भाया तेरा विचार, भाषा हिंदी,इसकी लिपि बनी भाषा उसकी, भाषा हिंदी,हिन्द की संम्पर्क भाषा, भाषा हिंदी,फोन कन्याकुमारी से पहुंचता कश्मीर, भाषा हिंदी,फैक्स गुजरात से पहुंचती आसाम, भाषा हिंदी,हिन्द की संम्पर्क भाषा, भाषा हिंदी,हर व्यक्ति की सांस, हिन्द की धड़कन, भाषा हिंदी,हर स्थान की बोली, हिन्द की पहचान, भाषा हिंदी,हिन्द…
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4. और लम्बी होंगी बेरोजगार की शृंखलाएं
आलेख – सामाजिक चेतना मातृवन्दना सितम्बर 2008भारत में औद्योगिक क्रांति आने के पश्चात्, कल-कारखानों और मशीनों के बढ़ते साम्राज्य से असंख्य स्नातक, बेरोजगार की श्रृंखलाओं में खड़े नजर आने लगे हैं l उनके हाथों का कार्य कल-कारखाने और मशीनें ले चुकीं हैं l वह कठोर शरीर-श्रम करने के स्थान पर भौतिक सुख व आराम की…
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4. राष्ट्र -हित कितना बौना!
28 सितम्बर 2008 कश्मीर टाइम्सकिसी व्यक्ति का-अपना परिवार, परिवार का-समाज, समाज का-क्षेत्र, क्षेत्र का-राज्य, राज्य का-राष्ट्र, और राष्ट्र का-विश्व पूरक होता है। वे सब एक दूसरे पर निर्भर करते हैं। इन्हें स्वयं के निर्वहन हेतु आपस में मधुर संबंध और सामंजस्य बनाए रखना अति आवश्यक है।व्यक्ति से लेकर परिवार, समाज, क्षेत्र, राज्य और राष्ट्र को…
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3. सुखदायक सत्य कड़वा होता है
14 सितम्बर 2008 कश्मीर टाइम्सयोग्य गुरु द्वारा दिया जाने वाला ज्ञान सुपात्र का प्रदान किया जाता है, कुपात्र को नहीं। सुपात्र उसका सदुपयोग करता है जबकि कुपात्र दुरुपयोग। वही विद्यार्थी गुरु का मान बढ़ाता है और स्वयं महान बनता है जो गुरु के निर्देशानुसार जन सेवा एवं जग कल्याण के कार्य करता है।1 प्रकृति का…
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1. शहरी नाले की व्यथा
27 जुलाई 2008 कश्मीर टाइम्सअपना भी स्वच्छ जल था मेरासदा स्वच्छ ही नीर बहता थाहर जगह उपयोगी पानी चाहने बालोमुझमें गंदगी बहाओ नमुझे और दूषित बनाओ नतुम सुबहशाम आकर यहीं नहाते थेधोकर कपड़े साहिल पर ही सुखाते थेबना शिकार मच्छली चाव से खाने बालोमुझमें गंदगी बहाओ नमुझे और दूषित बनाओ नमेरे जल संग जल गंदा…
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2. बलि का बकरा
13 जुलाई 2008 कश्मीर टाइम्स समाजिक जन चेतना आज तक हमने देव स्थानों पर बकरों की बलि दिया जाना सुना था पर यह नहीं सुना था कि सड़क के किनारे बस की सवारियों को भी बलि का बकरा बनाया जाता है l जी हाँ, ठीक सुना आपने, ऐसा अब खुले आम हो रहा है l…
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3. आओ पर्यावण स्वच्छ बनाएं
जून 2008 मातृवंदनाविश्व में हमारी दैनिक आवश्यकताएं बहुत हैं। वह इस समय इतनी अधिक बढ़ गई हैं कि उनसे हमें पल-पल सोचने ही के लिए नहीं बल्कि कुछ न कुछ करने के लिए भी बाध्य होना पड़ता है। हम जो भी कार्य करते हैं भले ही के लिए करते हैं परन्तु कभी-कभी यह भलाई के…