जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

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    6. समय

    दैनिक जागरण 28 मार्च 2006 क्या मैं समय का सदुपयोग कर रहा हूं?क्या मैं अपना भविष्य प्रकाशमय बना रहा हूं?विद्यार्थी हूं,मैं विद्या ग्रहण करता हूं क्या?समय है अनमोल,मैं विद्या-आचरण करता हूं क्या?विद्यार्थी जीवन में सीखना और जानना,क्या है निश्चय अपना?क्या पूरा होगा?जीवन का जो है निश्चित सपना,क्या मैं समय का मोल जानता हूं?क्या मैं समय…

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    5. विद्यालय

    दैनिक जागरण 20 मार्च 2006 विद्यालय में ज्ञान बीज का रोपण होता हैवहां विद्यार्थी होता है किसी अंकुर से कम नहींगुरु से विद्यार्थी पौध का पोषण होता हैवहां गुरु होता है किसी किसान से कम नहींविद्यालय में राजनीति की पैदा होती है नर्सरीखेती करने का वह कोई स्थान नहीं हैराष्ट्र ने विद्यालय से पौध प्राप्त…

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    4. स्वदेशी

    दैनिक जागरण 25 फरवरी 2006देश है प्यारा अपना स्वदेशीरहना है नित प्यारे स्वदेशजीना मरना लगे प्यारा स्वदेशीप्यार हुआ है संग प्यारे स्वदेशपा लेना है ज्ञान विदेशीभूल नहीं जाना है स्वदेशस्वदेश से नहीं प्यारे प्राण स्वदेशीस्वर्ग से भी प्यारा है स्वदेशउत्पादन बढ़ाना है देशी स्वदेशीपहुंचाना है उसे देश विदेशमुद्रा अर्जित करना देशी विदेशीचिड़िया सोने की फिर…

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    3. स्वाधीन भारत

    दैनिक जागरण 2 फरवरी 2006पराधीन देश में वो घड़ी लगती अच्छी थीस्थान स्थान पर तिरंगा फहराने कोलगाना जान की बाजी लगती अच्छी थीआज गीत वंदे मातरम गाने कोराष्ट्रीय गान का अपमान हो रहा क्योंहमारे स्वाधीन भारत मेंआतंकी संसद पर हमला हैं करतेहम आरपार की लड़ाई करने की हैं सोचा करतेउस पर हमला न करो वो…

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    2. देख सके तो

    दैनिक जागरण 8 जनवरी 2006 स्वामी सबका ईश्वर है प्राणी हैं अनेकजीवन सबका समान है देख सके तो मन से देखनारी सबकी जननी है माताएं हैं अनेकबच्चे सबके समान हैं देख सके तो मन से देखज्ञान जननी बुद्धि है मस्तिष्क हैं अनेकआत्म ज्ञान समान है देख सके तो मन से देखखून सबका लाल है विचार…

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    1. चेतना

    दैनिक जागरण 6 जनवरी 2006 सेवा जो कर न सकेवह तन है किस काम कानाम जो जाप न सकेवह मन है किस काम काकार्य जो सिद्ध कर न सकेवह धन है किस काम कासन्मार्ग जो दिखा न सकेवह ज्ञान है किस काम काजीवनरस जो भर न सकेवह धर्म है किस काम कामानवसृजन जो कर न…

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    1. ज्ञान चालीसा

    दिव्य हिमाचल 19.3.2005 1. लोक भ्रमण करने से विषय वस्तु को भली प्रकार समझा जाता है l 2. साहित्य एवंम सदग्रंथ पढ़ने से विषय वास्तु का बोध होता है l 3. अधिक से अधिक जिज्ञासा रखने से ज्ञान-विज्ञान जाना जाता है l 4. सुसंगत करने से विषयक ज्ञान-विज्ञान का पता चलता है l 5. बड़ों…

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    3. भूजल भंडार करे उद्धार

    दिव्य हिमाचल 23 दिसम्बर 2004नभ से बूंदाबांदी होती टिप टिप टिपधरा पर इधर उधर गिरती पड़ती टिप टिप टिपसांए सांए करती जलधारा बन करनाली नाला नदी रूप बन करपहाड़ से जंगल और मैदान की ओरजलधारा बढ़ती जलाश्य की ओरउसे बहना है वह बहती जाती हैपहाड़ से चलती सागर से मिल जाती हैवर्षा जल आता आंधी…

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    2. जल संकट नहीं होने देंगे

    दिव्य हिमाचल 7 दिसम्बर 2004जल की हर बूंद है अनमोलजल से जीवन का है मोलबूंदबूंद से भर जाता है घड़ापगपग पर जल करना है खड़ाबावड़ी बना कर कूप बना करतालाब बना कर जलाशय बना करबावड़ी यहां पर कूप वहां परतालाब यहां पर जलाशय वहां परभूजल का स्तर बढ़ाना हैनमीदार पेड़ जंगल उगाना हैनदियों को स्वच्छ…

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    1. शुद्ध भूजल जीवन आधार

    23 सितम्बर 2004 दिव्य हिमाचलवर्षा जल छत पर आएटिप-टिप-टिप,जल परनाला कूप में ले जाएटिप-टिप-टिप,शुद्ध जल सबने पीना है,भूजल से सबने जीना है,चेतन यह भूजल हैजीवन का आधार,मात्र शुद्ध भूजल है,जीवन का आधार,

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