नवीन लेख
विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
-
नवीनतम लेख
शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
-
खाली डिब्बा
बनाना मत घमंडी खुद को, न ही मैं कुछ हूं दर्शाना lखाली डिब्बा देह तेरा अपना, मनः न खाली रौब जमाना ll
-
साथ तेरे
पुरुषार्थ कर, हिम्मत रख, कोई भी तेरे साथ नहीं lमंजिल तुझे जरूर मिलेगी, मनः चाहे कोई भी तेरे साथ नहीं ll
-
दिल इन्सान का
मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, चर्च से बड़ा है दिल इन्सान का lभगवान् अवश्य मिल जाता, मनः तू दिल न दुखाता इन्सान का ll
-
संतोष का प्याला
पी ले संतोष का प्याला, जो तेरे पास है lमेहनत की है तूने जितनी, मनः फल तो तेरे पास है ll
-
धीरे-धीरे
खाना है तो ठंडा करके होंठ नाजुक जलते हैं lकाम अच्छा होता धीरे-धीरे, मनः शहद के भी छत्ते भरते हैं ll
-
जगत की रीत
पैदा हुआ सो मिट जायेगा, है यही जगत को रीत lझूठी है हर वस्तु यहाँ, मनः ज्यादा न बढ़ा प्रीत ll
-
घर
ओह ! चेहरा भीग गया है, क्यों आंसू गिराती हैं आँखें lयहाँ घर अपना नहीं है किसीका, मनः तू भर न यों ही आहें ll
-
मुसीबत
मुसीबत की कोई मजाल नहीं, शक्ति तो तेरी भुजाओं में है l चाहे तो उनका मुकाबला कर, मनः हिम्मत तो तेरे दिल में है ll