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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
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3. भूजल भंडार करे उद्धार
दिव्य हिमाचल 23 दिसम्बर 2004नभ से बूंदाबांदी होती टिप टिप टिपधरा पर इधर उधर गिरती पड़ती टिप टिप टिपसांए सांए करती जलधारा बन करनाली नाला नदी रूप बन करपहाड़ से जंगल और मैदान की ओरजलधारा बढ़ती जलाश्य की ओरउसे बहना है वह बहती जाती हैपहाड़ से चलती सागर से मिल जाती हैवर्षा जल आता आंधी…
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2. जल संकट नहीं होने देंगे
दिव्य हिमाचल 7 दिसम्बर 2004जल की हर बूंद है अनमोलजल से जीवन का है मोलबूंदबूंद से भर जाता है घड़ापगपग पर जल करना है खड़ाबावड़ी बना कर कूप बना करतालाब बना कर जलाशय बना करबावड़ी यहां पर कूप वहां परतालाब यहां पर जलाशय वहां परभूजल का स्तर बढ़ाना हैनमीदार पेड़ जंगल उगाना हैनदियों को स्वच्छ…
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1. शुद्ध भूजल जीवन आधार
23 सितम्बर 2004 दिव्य हिमाचलवर्षा जल छत पर आएटिप-टिप-टिप,जल परनाला कूप में ले जाएटिप-टिप-टिप,शुद्ध जल सबने पीना है,भूजल से सबने जीना है,चेतन यह भूजल हैजीवन का आधार,मात्र शुद्ध भूजल है,जीवन का आधार,
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6. दानवता का अहसास
7 दिसम्बर 1996 कश्मीर टाइम्सहिंसा करता मैं धर्म के नाम पर,धर्म पशुता में अंतर रहा क्या?इंसान हूँ कहलाता मैं मगरबन गया पशु, अर्थ रहा क्या?बस एक इंसान हूँ मैं मगरभेड़िये की खाल में रहता क्यों?बातें धर्म की करता मैं मगरलहू बेगुनाहों का बहाता क्यों?हिंसा है धर्म दानव का,सबको मरने की रह दिखाई है,हिंसा करना है…
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18. आत्म-शान्ति पाने के उपाय
आलेख – कश्मीर टाइम्स 3.12.1996 मानव जीवन में व्यक्ति की ओर से अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने के लिए उचित यह है कि उसके अपने अमूल्य जीवन का कोई ना कोई बड़ा उद्देश्य अवश्य हो l उससे भी अधिक जरुरी है, उसकी ओर से उस उद्देश्य को अपने दायित्व के साथ पूरा करने की चेष्टा…
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17. समाज के प्रति सजगता
आलेख – कश्मीर टाइम्स 21.11.1996 नैतिक शक्ति से व्यक्तित्व निर्माण होता है जबकि अनुशासन से जन शक्ति, ग्राम शक्ति एवं राष्ट्र शक्ति का l इसी प्रकार कुशल नेतृत्व में अनुशासित संगठन शक्ति द्वारा संचालित जो शासन भेदभाव रहित सबके हित के लिए एक समान न्याय करता है, वह सुशासन होता है l जन्म लेने के…
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16. क्या हमारा जीवन त्रुटिपूर्ण है ?
17 नवम्बर 1996 कश्मीर टाइम्स मानव जीवन दर्शन प्रगति करने वाला विवेकशील मनुष्य अपने जीवन को सदैव त्रुटिपूर्ण मानता है l वह उन त्रुटियों के होने की कभी चिंता नहीं करता है बल्कि उनको दूर करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है l आधुनिक काल में हर स्थान पर हड़तालें, बंद, घेराव, संप्रदायक दंगे, हिंसा…
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15. सुख – शान्ति कैसे प्राप्त करें
14 नवम्बर 1996 कश्मीर टाइम्सहमारा जीवन जितना अल्पायु का है उससे कई गुणा बढ़कर कामनाओं की उसमें अधिकता रहती है l हमारा मन किसी न किसी इच्छा का शिकार बना रहता है l भले ही वह कोई नर हो या नारी उनके जीवन में कोई न कोई रोग, शोक या व्याधि देखने को अवश्य मिल…
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14. क्या स्वराज ही लोकराज की इकाई है ?
आलेख – कश्मीर टाइम्स 8.11.1996जब कभी हम एकाकी जीवन में निराशा अनुभव करते हैं तब उस समय हमारी ऐसी भी भावना पैदा हो जाती है कि चलो कहीं किसी सज्जन के पास हो आयें या कहीं किसी रमणीय स्थल पर घूम आयें l यही नहीं हम थोड़ी देर पश्चात् वहां चल भी देते हैं l…
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13. अपने प्रति अपनी सजगता
आलेख – कश्मीर टाइम्स 21.10.1996 मानव मन जो उसे नीच कर्म करने से रोकता है, विपदा आने से पूर्व सावधान भी करता है, वह स्वयं बड़े रहस्यमय ढंग से एक ऐसे आवरण में छुपा रहता है जिसके चारों ओर विषय, वासना और विकार रूपी एक के पश्चात् एक पहली, दूसरी तीसरी और चौथी परत के…