जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

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    1. स्वाधीन भारत में

    ज्ञान वार्ता छमाही 2010 पराधीन देश में, वो घड़ी लगती अच्छी थी स्थान-स्थान पर तिरंगा फहराने को लगाना जान की बाजी, लगती अच्छी थी आज गीत वन्दे मातरम् गाने कोराष्ट्रीय गान का, अपमान हो रहा क्यों ?हमारे स्वाधीन भारत में ! आतंकी संसद पर हमला हैं करते हम आर-पार की लड़ाई करने की हैं सोचा…

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    1. संपर्क भाषा

    ज्ञान वार्ता छमाही 2010 मेरे मन भाया तेरा विचार, भाषा हिंदी इसकी लिपी बनी भाषा उसकी, भाषा हिंदी हिन्द की सम्पर्क भाषा, भाषा हिंदी फोन कन्याकुमारी से पहुँचता कश्मीर, भाषा हिंदी फैक्स गुजरात से पहुँचती आसाम, भाषा हिंदीहिन्द की सम्पर्क भाषा, भाषा हिंदी हर व्यक्ति की साँस, हिन्द की धड़कन, भाषा हिंदी हर स्थान की…

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    2. वैदिक वर्ण व्यवस्था का सत्य

    मातृवंदना मई 2010 इस लेख का मुख्य प्रेरणा-स्रोत लाला ज्ञान चंद आर्य द्वारा लिखित “वर्ण व्यवस्था का वैदिक रूप” पुस्तक है l यह पुस्तक उनका अपने आप में एक हृदय स्पर्शी और अनूठा प्रयास है l पुस्तक में दर्शाया गया है – मानव शरीर के अवयव मुख-ब्राह्मण, बाहु-क्षत्रिय, उदर–वैश्य और पैर–शूद्र हैं l प्रत्येक मनुष्य…

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    3. चोर

    21 मार्च 2010 कश्मीर टाइम्सकाला होता है मन मेरा, काला ही सबको कहता हूँ, चोर भाव छुपाता है मन मेरा, चोर ही सबको कहता हूँ, नजर मेरी सबको देखती है, पर खुद को न कभी देख पाई है, ढूंढता हूँ बाहर, छुपाए चोर भीतर, नहीं बात समझ में आई है, चोर हूँ, क्यों न चोरी…

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    2. भटका राही

    कश्मीर टाइम्स 21 फरवरी 2010 भटक गया हूँ, राह से राह मैं अपनी भूलकर सही राह पर, आऊं भी तो कैसे? मैं राह खुद की खुद पहचानकर इच्छा और आशाओं के गहन अंधेरे में खो गया मेरा जीवन है तालाश खुद की, खुद करूँ कैसे? मैं नाहक बन गया दीन हीन हूँ क्या है अच्छा,…

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    1. चैक डैम

    कश्मीर टाइम्स 7 फरवरी 2010 थम जा, ये जल की धारा! छोड़ उतावली, बहे जाती है किधर?मुंह उठा, देख तो जरा, चैक डैम बन गया है इधरतू बाढ़ का भय दिखाना पीछे, पहले गति मंद करले अपनी,तू भूमि कटाव भी करना पीछे, पहले चाल धीमी करले अपनी,यहां रोकना है, थोड़ी देर, रुक सके तो रुक…

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    1. मानवी उर्जा – ब्रह्मचर्य

    जनवरी 2010 मातृवन्दनाविद्यार्थी जीवन को ब्रह्मचर्य जीवन कहा गया है। इस काल में विद्यार्थी गुरु जी के सान्निध्य में रह कर समस्त विद्याओं का सृजन, संवर्धन और संरक्षण करके स्वयं अपार शक्तियों का स्वामी बनता है। सफल विद्यार्थी बनने के लिए विद्यार्थी को ब्रह्मचर्य या मानवी उर्जा का महत्व समझना अति अवष्यक है। ब्रह्मचर्य के…

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    1. छब्बीस जनवरी

    मातृवंदना जनवरी 2010 दुखिया का दुःख मिटाने को, दुःख से राहत दिलाने को, आशा का दीपक बन हम जगमगाएँ, छब्बीस जनवरी है आज, आओ! खुशी का दिन मनाएंयुवावर्ग में हो नवजीवन का संचार, दूर भागे सबकी निराशाओं का अंधकार, काँटों में से फूल हम चुनचुन कर लाएँ, छब्बीस जनवरी है आज, आओ! खुशी का दिन…

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    3. स्वदेश प्रेम

    मातृवंदना दिसम्बर 2009 स्वदेशी पका, पौष्टिक, ताजा खाने वालो!तुम फास्ट-फूड खाते हो क्यों ?पहले सदा अरोग्य ओर स्वस्थ रहते थे,अब तुम रोगी बन रहे हो क्यों?फास्ट-फूड है विदेशी खाना,कोई नहीं कहता, यह भारत के हैं पकवान,पकवान स्वदेशी छोड़, तुम खाते विदेशी पकवानकोई नही कहेगा,तुम्हें स्वदेश से है ममता महान

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    9. विश्व दर्पण में भारतीय संस्कृति

    20 दिसम्बर 2009 दैनिक कश्मीर टाइम्स प्राचीन भारतवर्ष  विश्व  मानचित्र पर आर्यावर्त देश रहा है। आर्य वेदों को मानते थे। वे अपने सब कार्य वेद सम्मत करते थे। वेद जो देव वाणी पर आधारित हैं, उन्हें ऋषि  मुनियों द्वारा श्रव्य एवं लिपिबद्ध किया हुआ माना जाता है। वेदों में ऋगवेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद प्रमुख हैं । वे सब सनातन…

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