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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
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एक दूसरे के आश्रय से
अनमोल वचन :-एक अकेला वृक्ष, बलवान और सुदृढ़ होने पर भी वायु के द्वारा बल पूर्वक जड़ से उखाड़कर फैंका जा सकता है, किंतु जो वृक्ष मिलकर सामूहिक रूप से सुप्रतिष्ठित रहते हैं वे तीव्र आंधी को एक दुसरे के आश्रय से सह लेते हैं।
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वर्ण – आश्रम धर्म
अनमोल वचन :-किसी भी प्राणी की हिंसा न करना – कष्ट न पंहुचाना, मधुर वचन बोलना, सत्य भाषण करना, बाहर और भीतर से पवित्र रहना एवं शौचाचार का पालन करना, दीनों के प्रति दयाभाव रखना तथा क्षमा (निन्दा आदि को सह लेना) ये चारों वर्णों तथा आश्रमों के सामान्य धर्म कहे गए हैं।
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विज्ञान बिना
अनमोल वचन :-जो विज्ञानवान् नहीं होता जिसका मन सदा अयुक्त होता है, उसकी इंद्रियां सारथी के दुष्ट घोड़े की तरह उसके वश में नहीं होती।
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लक्षमण जी
लक्षमण जी भगवान श्रीराम से कहते हैं – भैया! उत्साह ही बलवान होता है, उत्साह से बढ़कर दूसरा कोई बल नहीं है। उत्साही पुरुष के लिए संसार में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं है।
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शस्त्र और बुद्धि
अनमोल वचन :-शस्त्र के द्वारा मारे जाने वाले व्यक्ति सही अर्थों में नहीं मारे जाते हैं, बल्कि बुद्धि के द्वारा मारे जाने वाले ही सही अर्थों में निहत होते हैं, क्योंकि शस्त्रों के द्वारा तो व्यक्ति का केवल शरीर ही नष्ट होता है किंतु बुद्धि द्वारा उसके कुुल, वैभव व यश का नाश होता है।
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ब्रह्म ही ब्रह्म
अनमोल वचन :-यज्ञ में किया जाने वाला अर्पण ब्रह्म है, यज्ञ में प्रयुक्त हवन-सामग्री भी ब्रह्म है, ब्रह्म रूप कर्ता के द्वारा ब्रह्मरूप अग्नि में आहुति देने की क्रिया भी ब्रह्म है। इस ब्रह्म कर्म में समाधिस्थ साधक द्वारा प्राप्त किया जाने वाला फल भी ब्रह्म ही है।
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वैरागी पुरुष
अनमोल वचन :-जो पुरुष सांसारिक आश्रय से रहित सदा परमानन्द परमात्मा में तृप्त है, वह कर्मों के फल और संग अर्थात कर्तव्य-अभिमान को त्यागकर कर्म में अच्छी प्रकार बर्तता हुआ भी कुछ भी नहीं करता है।