नवीन लेख
विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
-
नवीनतम लेख
सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
-
1. सनातन धर्म एवं संस्कृति
अप्रैल मई 2015 मातृवंदनासभी कष्ट दूर हो जाते हैं l कोई समस्या शेष नहीं रहती है l विपदाओं का भी शमन हो जाता है l इसके लिए मनुष्य को सत्सनातन-धर्म का अनुसरण करना पड़ता है l वह धर्म मुख्यतः तीन बातों पर आधारित है – सत्य, सनातन और धर्म l परम पिता परमात्मा विशाल दिव्य…
-
1. देश हमारा
मातृवन्दना सितम्बर 2014 जन-जन का देख भाई चारा,विश्व हुआ हैरान हैदवी जुवान से प्रसंशा करता,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम——— वन्दे मातरमतरह तरह के फूल इसके,फूलदान में सब एक हैंसुगंध फैलाते चहुं ओर अपनी,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम————–वन्दे मातरमखेलना इन्हें पसंद तूफानों से,खुदको मिटा देना शान सेआन बान शान बनाए रखना,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम———- वन्दे मातरमबुरी…
-
2. राम-राज्य कैसे हो साकार?
राष्ट्रीय भावना मातृवन्दना मार्च-अप्रैल 2014 प्राचीन काल से ही भारत भूमि ऋषि-मुनियों की तपो भूमि रही है। यह सब उन्हीं के तप का प्रतिफल है कि भारतवर्ष विश्व के मानचित्र पर आर्यवर्त के नाम से सर्व विख्यात हुआ। समय की मांग के अनुसार उसमें वेद, भाष्य, ऋचाएं, रामायण और गीता जैसे अन्य अनेकों धर्म-ग्रंथों की…
-
1. समाज एवं राष्ट्र की सुरक्षा के मानदंड
जनवरी 2014 मातृवन्दना व्यक्तिगत और पारिवारिक सुरक्षा से बड़ी सामाजिक सुरक्षा है और सामाजिक सुरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्र की सुरक्षा है। अतएव देश के भविष्य हेतु हमारे युवाओं को कुछ मानदंड स्थापित करने होंगे जिनके लिए उन्हें निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना होगा1 मानव समाज सदैव वीरों की पूजा करता है, कायरों की नहीं।2 समाज में…
-
3. भू-जल स्तर में कैसे होगी वृद्धि ?
दिसम्बर 2013 मातृवंदना पर्यावरण चेतना भू-जल स्तर में आ रही निरंतर गिरावट को जल का सदुपयोग करने से रोका जा सकता है l इससे भूजल स्तर की पुनः वृद्धि हो सकती है l इसके लिए हमें आज ही से निरंतर जागरूक रहकर स्वयं कुछ प्रयास करने होंगे l जब भी पानी पीना हो, स्वास्थ्य का…
-
2. स्लोगन जल बाईसा
ज्ञान वार्ता छमाही 2013 जल है गुणों की खान, धरती की बढ़ाये शान, जल रहेगा,जीवन बचेगा, भू-जल बढ़ाओ,जीवन बचाओ, जल के संग,जल के रंग,जल है जहाँ, जीवन है वहां, जल, जीवन की आशा, सूखा, निराशा ही निराशा,जल की कहानी,जीवन की कहानी, जहाँ भू-जल सहारा है,वहां जीवन हमारा है, जल से पढ़, पेड़ों से जंगल,सूखे में…
-
2. युवा पीढ़ि और उसका दायित्व
अक्तूबर 2013 मातृवन्दना ईश्वर द्वारा रचित प्रकृति में पृथ्वी और उसके चारों ओर ब्रह्माण्ड बड़ा विचित्र है। सूर्य में ताप, चन्द्रमा में चांदनी, वायु में सरसराहट और नदियों में कल-कल मधुर संगीत का मिश्रण इस बात का द्योतक है कि समस्त ब्रह्माण्ड में कोेेई भी अमुक वस्तु किसी न किसी गुण विशेष के लिए अपना महत्व…
-
1. जल – धारा से
मातृवन्दना अक्तूबर 2013 थम जा, ऐ जल की धारा ! छोड़ उतावली, बहे जाती है किधर?मुंह उठा, देख तो जरा चैकडैम बन गया है इधर तू बाढ़ का भय दिखाना पीछे पहले गति मंद कर ले अपनी तू भूमि कटाव भी करना पीछेपहले चाल धीमी कर ले अपनी यहाँ रोकना है थोड़ी देररुक सके तो…
-
1. भारतीय गुरुकुल परंपरा
12 अक्तूबर 2013 दिव्य हिमाचल प्रकृति में आध्यात्मिक एवं भौतिक ज्ञान-विज्ञान प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। कोई जिज्ञासु-पुरुषार्थी विद्यार्थी ही नरेंद्र की तरह उसे जानने, समझने और पाने के लिए कृत संकल्प होता है और अपने सद्गुरु रामकृष्ण परमहंस जी के सान्निध्य और गुरुकुल में रहकर निरंतर प्रयास एवं अभ्यास करके स्वामी विवेकानन्द बनता है।…
-
1. संपूर्ण लोक विकास : समस्या और समाधान
मातृवंदना जुलाई 2013 इस सृष्टि की संरचना कब हुई ? कहना कठिन है l सृष्टि के रचयिता ने जहाँ प्रत्येक प्राणी को जीवित रहने के लिए आहार की व्यवस्था की है, वहां मनुष्य के जीवन से संबंधित हर पक्ष के साथ एक विपरीत पहलू भी जोड़ा है l जहाँ सुख है, वहां दुःख भी है…