जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

  • मेहमान न बन

    मेहमान न बन तू किसीका, रोजाना न कर तू आना जाना l मेहमान तू रहेगा नहीं, मनः बहुतों ने तो कुत्ता माना ll

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  • चाहे चन्दन डालो

    चाहे चन्दन डालो, चाहे सादा इंधन, बस देह का संस्कार होगा l अमीर-गरीब का भेद यहाँ, मनः आगे हिसाब कर्म का होगा ll

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  • खोखला ढोल

    खोखला ढोल ढम-ढम करता, गाना तो वह गा नहीं सकता l तू शोर धर्म का करता, मनः जब उस पर चल नहीं सकता ll

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  • सत्य है तुझसे

    सत्य है तुझसे जुदा नहीं, वह तुझ में ही समाया है l तार सितार से जुदा नहीं, मनः आवाज सितार से ही आया है ll

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  • कभी-कभी

    कभी-कभी ऐसा हो गया, भ्रम में अँधेरा, प्रकाश हो गया l अँधेरा तो अँधेरा ही रहा, पर मनः तू भ्रष्ट राही हो गया ll

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  • उत्तम विद्या

    ले लेना तू उत्तम विद्या नीच से, दूषित कुल से स्त्री रत्न l कह गया कोई संत प्यारा, मनः हर्ज नहीं करना ऐसा यत्न ll

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  • जाप सके तो

    जाप सके तो जाप ले तू, ॐ ॐ हर साँस lफिर क्या जाप पायेगा, मनः निकल जाएगी तेरी हर साँस ll

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  • समय की मांग

    कश्मीर टाइम्स 30 नवम्बर 2008 वह भी एक समय था जब देश में हर नौजवान किसी न किसी हस्त–कला अथवा अपने रोजगार से जुड़ा हुआ रहता था l चारों ओर सुख समृद्धि थी l देश में कृषि योग्य भूमि की कहीं कमी नहीं थी l पर ज्यों-ज्यों देश की जन संख्या टिड्डीदल की भांति बढ़ती…

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    विद्या मंदिर और उसकी भूमिका

    अगस्त 2022 मातृवंदना शिक्षा दर्पण माँ-बाप का सान्निध्य घर/परिवार बच्चे के लिए संस्कार, संस्कृति और सभ्यता निर्माण करने की पहली पाठशाला है l गुरु का सान्निध्य पाठशाला, विद्या मंदिर विद्यार्थी के लिए देश, सनातन धर्म-संस्कृति के प्रति जागरूक एवं सेवा हेतु तैयार करने वाली दूसरी पाठशाला है l शिक्षा नीति :– कोई भी भाषा सीखना बुरा…

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  • 5. स्वातन्त्र्य आन्दोलन में आध्यत्मिक गुरुओं का योगदान

    मार्च-अप्रैल 2022 मातृवंदना मनुष्य जीवन में गुरु मनुष्य जीवन में गुरु का महत्वपूर्ण और सर्वोच्च स्थान है l भारतीय संस्कृति में सबसे पहला गुरु माता को माना गया है l शिशु के बड़ा होने पर उसे अक्षर ज्ञान देने वाला गुरु उसके बाद आता है l अध्यात्म और भक्तिमार्ग में दिशा देने वाला गुरु उसके…

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