जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

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    1. जल धारा कराती है शिवलिंगों को स्नान

    आलेख – दैनिक जागरण 17.5.2006 देव भूमि हिमाचल प्रदेश में – सुल्याली गाँव तहसील नूरपुर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है l इसी गाँव में एक कंगर नाला के ठीक उस पर, स्वयम प्रकट हुए आप अनादिनाथ शिव शंकर-भोले नाथ शम्भू जी का प्राचीन मंदिर है जो स्वयं निर्मित एक ठोस पहाड़ी…

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    8. समर्थ की पहचान

    दैनिक जागरण 14 मई 2006 निर्बल असमर्थ ही छुपता बनता कायर हैबलवान समर्थ करता शूरता का कार्य हैरखता है ध्यान सदा अपने हर कर्म काछोड़ता है संग अपने हर दुष्कर्म काकरता सद्गुणों से जीवन का श्रृंगार हैदेखता जन का जन से होता प्यार हैमनवा जब तू करेगा पाप नहींतब बन पाएगा समर्थ कैसे आप नहीं

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    7. बुरा नहीं है

    दैनिक जागरण 29 मार्च 2006 अपनी बात काटने वाले सेकारण पूछ लेना अच्छाअपनी कमीं जानी जा सकेतो कोई बुरा नहीं हैबात स्पष्ट करने वाले कोअभय दान देना अच्छाकोई सच्चाई सामने आ जाएतो कोई बुरा नहीं हैअपनी बात कहने वाले कीजरूरत जान लेना अच्छाकोई अमूल्य जीवन संवर जाएतो कोई बुरा नहीं हैसभा में भाग लेने कोसमय…

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    6. समय

    दैनिक जागरण 28 मार्च 2006 क्या मैं समय का सदुपयोग कर रहा हूं?क्या मैं अपना भविष्य प्रकाशमय बना रहा हूं?विद्यार्थी हूं,मैं विद्या ग्रहण करता हूं क्या?समय है अनमोल,मैं विद्या-आचरण करता हूं क्या?विद्यार्थी जीवन में सीखना और जानना,क्या है निश्चय अपना?क्या पूरा होगा?जीवन का जो है निश्चित सपना,क्या मैं समय का मोल जानता हूं?क्या मैं समय…

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    5. विद्यालय

    दैनिक जागरण 20 मार्च 2006 विद्यालय में ज्ञान बीज का रोपण होता हैवहां विद्यार्थी होता है किसी अंकुर से कम नहींगुरु से विद्यार्थी पौध का पोषण होता हैवहां गुरु होता है किसी किसान से कम नहींविद्यालय में राजनीति की पैदा होती है नर्सरीखेती करने का वह कोई स्थान नहीं हैराष्ट्र ने विद्यालय से पौध प्राप्त…

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    4. स्वदेशी

    दैनिक जागरण 25 फरवरी 2006देश है प्यारा अपना स्वदेशीरहना है नित प्यारे स्वदेशजीना मरना लगे प्यारा स्वदेशीप्यार हुआ है संग प्यारे स्वदेशपा लेना है ज्ञान विदेशीभूल नहीं जाना है स्वदेशस्वदेश से नहीं प्यारे प्राण स्वदेशीस्वर्ग से भी प्यारा है स्वदेशउत्पादन बढ़ाना है देशी स्वदेशीपहुंचाना है उसे देश विदेशमुद्रा अर्जित करना देशी विदेशीचिड़िया सोने की फिर…

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    3. स्वाधीन भारत

    दैनिक जागरण 2 फरवरी 2006पराधीन देश में वो घड़ी लगती अच्छी थीस्थान स्थान पर तिरंगा फहराने कोलगाना जान की बाजी लगती अच्छी थीआज गीत वंदे मातरम गाने कोराष्ट्रीय गान का अपमान हो रहा क्योंहमारे स्वाधीन भारत मेंआतंकी संसद पर हमला हैं करतेहम आरपार की लड़ाई करने की हैं सोचा करतेउस पर हमला न करो वो…

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    2. देख सके तो

    दैनिक जागरण 8 जनवरी 2006 स्वामी सबका ईश्वर है प्राणी हैं अनेकजीवन सबका समान है देख सके तो मन से देखनारी सबकी जननी है माताएं हैं अनेकबच्चे सबके समान हैं देख सके तो मन से देखज्ञान जननी बुद्धि है मस्तिष्क हैं अनेकआत्म ज्ञान समान है देख सके तो मन से देखखून सबका लाल है विचार…

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    1. चेतना

    दैनिक जागरण 6 जनवरी 2006 सेवा जो कर न सकेवह तन है किस काम कानाम जो जाप न सकेवह मन है किस काम काकार्य जो सिद्ध कर न सकेवह धन है किस काम कासन्मार्ग जो दिखा न सकेवह ज्ञान है किस काम काजीवनरस जो भर न सकेवह धर्म है किस काम कामानवसृजन जो कर न…

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    1. ज्ञान चालीसा

    दिव्य हिमाचल 19.3.2005 1. लोक भ्रमण करने से विषय वस्तु को भली प्रकार समझा जाता है l 2. साहित्य एवंम सदग्रंथ पढ़ने से विषय वास्तु का बोध होता है l 3. अधिक से अधिक जिज्ञासा रखने से ज्ञान-विज्ञान जाना जाता है l 4. सुसंगत करने से विषयक ज्ञान-विज्ञान का पता चलता है l 5. बड़ों…

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