जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

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    2. जय भारत देश महान

    आलेख – राष्ट्रीय भावना दैनिक जागरण 18 अगस्त 2007 वह भारत का स्वर्णयुग ही था जब देश का कोई भी नौजवान अपने बल, साहस, सुझबुझ और विद्या-ज्ञान आदि गुणों से सदैव परिपूर्ण रहता था l इसी कारण वह स्थानीय क्षेत्र से बढ़कर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और समस्त विश्व स्तर पर भी पहुँच जाता था l वहां…

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    1. आस्था की दहलीज

    आलेख – धर्म अध्यात्म संस्कृति  दैनिक जागरण 1.8.2007  हमारे देश में ऐसे अनेकों धार्मिक व तीर्थ स्थल हैं जिनके साथ हमारी पवित्र आस्थाएं जुड़ी हुई हैं l हम वहां अपनी किसी न किसी कामना सहित देव दर्शनार्थ जाते हैं और अपनी कामना पूरी होने पर उन्हें श्रद्धा सुमन भी अर्पित करते हैं l इससे हमें…

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    19. पानी को बचाएं

    दैनिक जागरण 15 जून 2007 पानी लेकर बंद करना है नलभाई यों ही व्यर्थ नहीं बहाना है जलसब्जी या फलों को धोकरक्यारी में डाल देना है पानीक्यारी में नमी रहेगीनाली में नहीं जाने देना है पानीशेष बचा बोतल या बाल्टी का पानीहै क्यारी के पौधों का पानीकल के लिए ढक करआज रखना है पेयजलसंभलकर कल…

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    18. क्रांतिकारी

    दैनिक जागरण 13 जून 2007 पल भर नहीं जो कर्महीन रहताकुछ न कुछ करता रहता हैरखता अज्ञान शोषण अत्याचार पर कड़ी नजरदहकते अंगारों पर बे खबर चलता हैराह में मुसीबतें आएं चाहे जितनीवह नित आगे बढ़ता जाता हैमौत भी सामने क्यों न आएवह खुशी से निज कण्ठ लगाता हैक्रांति कभी आ नहीं सकतीहै यह तो…

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    17. सीने में

    दैनिक जागरण 27 मई 2007 कोई चिंगारी शोला नहीं बन सकतीऐसा उसमें दम नहींशोला चिंगारी से बनता हैपर चिंगारी शोले से नहींतिल भर चिंगारी में इतना दम हैपल भर में उससे शोला बन जाता हैशोला तो दहकता अंगारा हैउससे सब कुछ राख हो जाता हैसीने में जिसके आग दवी होदवा ही उसको रहने दोपंखा न…

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    1. श्रृंगार धौलाधार का

    पंजाब केसरी 21 मई 2007 कैसी सुंदर ओढ़ी बर्फीली चादर धौलाधार ने शुष्क मौसम से पाई मुक्ति धौलाधार ने नाले भरे नदियाँ सब बहने लगे हैं ताल बावड़ियाँ कूप सब जल से भरने लगे हैं धरती, खेतों, खलिहानों को मिलने लगा है पानी रिमझिम बरसने लगा है पानी बर्फ से किया फिर शृंगार धौलाधार ने…

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  • 1. श्रृंगार धौलाधार का

    पंजाब केसरी 21 मई 2007 कैसी सुंदर ओढ़ी बर्फीली चादर धौलाधार ने शुष्क मौसम से पाई मुक्ति धौलाधार ने नाले भरे नदियाँ सब बहने लगे हैं ताल बावड़ियाँ कूप सब जल से भरने लगे हैं धरती, खेतों, खलिहानों को मिलने लगा है पानी रिमझिम बरसने लगा है पानी बर्फ से किया फिर शृंगार धौलाधार ने…

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  • 1. श्रृंगार धौलाधार का

    पंजाब केसरी 21 मई 2007कैसी सुंदर ओढ़ी बर्फीली चादर धौलाधार ने शुष्क मौसम से पाई मुक्ति धौलाधार ने नाले भरे, नदियाँ सब बहने लगे हैं ताल, बावड़ियाँ, कूप सब जल से भरने लगे हैं धरती, खेतों, खलिहानों को मिलने लगा है पानी रिमझिम बरसने लगा है पानी बर्फ से किया फिर शृंगार धौलाधार ने आह…

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    16. भू – जल दोहन

    दैनिक जागरण 18 मई 2007बूंद बूंद से होता है भूजल पुनर्भरणसुनियोजित करना है भूजल दोहन व्यवहारसुरक्षित रखना है शुद्ध भूजल भंडारसुखी रहेगा मनमोहन संसारभूजल धरती की है अमूल्य सम्पत्तिव्यर्थ दोहन है आने वाली विपत्तिभूजल धरती का करता है श्रृंगारअनावश्यक दोहन सरासर है निराधार

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    15. कविता

    दैनिक जागरण 15 मई 2007 वीरों की तू पोषणहारी तू है कविता कवि की प्यारी देखा है मैंने तुझे सबके साथ पर वे सब तुझे नहीं लगाते हाथ अत्याचारी की तू हत्यारी तू है कविता कवि की प्यारीजिसने किया जब नीचता को सलामतूने किया उसका काम तमाम दुराचारी की तू संहारणहारी तू है कविता कवि…

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