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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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2. विश्व दर्पण में भारतीय संस्कृति
फरवरी 2011 मातृवंदनाप्राचीन भारत वर्ष विश्व मानचित्र पर आर्यावर्त देश रहा है l आर्य वेदों को मानते थे l वे अपने सब कार्य वेद सम्मत करते थे l वेद जो देव वाणी पर आधारित है, उन्हें ऋषि मुनियों द्वारा श्रव्य एवम् लिपिवद्ध किया हुआ माना जाता है l वेदों में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद अथर्वेद प्रमुख…
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1. सनातन है जीने की कला !
15 जनवरी 2011 कश्मीर टाइम्सकिसी ने ठीक ही कहा है – “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत lपारब्रह्म को पाइए, मन ही के प्रतीत”अर्थात मन से हार मान लेने से मनुष्य की हार होना निश्चित है परन्तु हारकर भी मन से न हारना और युक्ति-युक्त होकर अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए…
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3. समृद्ध भारत और उसकी गरिमा
दिसम्बर 2010 मातृन्दनाविश्व में भारत आर्यवर्त के नाम से जाना जाता था। उसे समृद्धि के उच्चासन पर सुशोभित करने का श्रेय देश के उन वीर व वीरांगनाओं को जाता है जो भारत के इतिहास में नक्षत्रों की भांति दीप्यमान हैं। उन्होंने अपने समस्त सुखभोगों का परहित के लिए त्याग कर दिया था। उन्हें राष्ट्र, समाज और जन हित…
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1. राष्ट्रीय समर्थ भाषा
2010 छमाही ज्ञान वार्तावह समाज और राष्ट्र गूंगा है जिसकी न तो कोई अपनी भाषा है और न लिपि। अगर भाषा आत्मा है तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि भाषा से किसी व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र की अभिव्यक्ति होती हैं।विश्व में व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र का भौतिक विकास और आध्यात्मिक उन्नति के लिए स्थानीय, क्षेत्रीय, प्रांतीय,…
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3. भारत माँ
मातृवन्दना नवम्बर 2010 तू धरती, हमारी माता, गुण तेरे सारा जग गाता, करते हैं हम तुझे प्रणाम, भारत माँ ————-भारत माँ,सागसब्जी, तू तिलहन उपजाती, अनाज, कंदमूल हमें खिलाती, तू माँ, हम तेरी संतान, भारत माँ ————-भारत माँतुझे दुःख हमसे मिलते, युग बीत गए पीड़ा सहते, तू देती नहीं ध्यान, भारत माँ ——–भारत माँपूत कपूत हो…
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4. वेद महिमा
कश्मीर टाइम्स 3 अक्तूबर 2010 वेद भारती संस्कृति, वेद भारती समृद्धि, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद भारती आयना, वेद भारती आत्मा, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद भारती ज्ञान, वेद भारती विज्ञान, सत्यमेव——-सत्यमेववेद आर्य कर्म, वेद आर्य धर्म, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद मान भारती, वेद प्राण भारती, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद भू भारती, आर्य भू भारती, सत्यमेव जयते——-सत्यमेव जयतेवेद भाग्य विधाता, वेद…
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2. हिंदी भाषा संकल्प
मातृवन्दना सितम्बर 2010 हिंदी हो, हिन्द की भाषा, हिंदी से हिन्द की पहचान हो, हम सब बोलें भाषा हिंदी, यही संकल्प हमारा होघर हो या दफ्तर, गली चाहे कोई दुकान हो, निःसंकोच हम बोलें भाषा हिंदी, यही संकल्प हमारा होबात हो पत्र लिखने की या विज्ञापन प्रकाशन हो, लिखें हम भाषा हिंदी, यही संकल्प हमारा…
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1. स्वाधीन भारत में
ज्ञान वार्ता छमाही 2010 पराधीन देश में, वो घड़ी लगती अच्छी थी स्थान-स्थान पर तिरंगा फहराने को लगाना जान की बाजी, लगती अच्छी थी आज गीत वन्दे मातरम् गाने कोराष्ट्रीय गान का, अपमान हो रहा क्यों ?हमारे स्वाधीन भारत में ! आतंकी संसद पर हमला हैं करते हम आर-पार की लड़ाई करने की हैं सोचा…
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1. संपर्क भाषा
ज्ञान वार्ता छमाही 2010 मेरे मन भाया तेरा विचार, भाषा हिंदी इसकी लिपी बनी भाषा उसकी, भाषा हिंदी हिन्द की सम्पर्क भाषा, भाषा हिंदी फोन कन्याकुमारी से पहुँचता कश्मीर, भाषा हिंदी फैक्स गुजरात से पहुँचती आसाम, भाषा हिंदीहिन्द की सम्पर्क भाषा, भाषा हिंदी हर व्यक्ति की साँस, हिन्द की धड़कन, भाषा हिंदी हर स्थान की…
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2. वैदिक वर्ण व्यवस्था का सत्य
मातृवंदना मई 2010 इस लेख का मुख्य प्रेरणा-स्रोत लाला ज्ञान चंद आर्य द्वारा लिखित “वर्ण व्यवस्था का वैदिक रूप” पुस्तक है l यह पुस्तक उनका अपने आप में एक हृदय स्पर्शी और अनूठा प्रयास है l पुस्तक में दर्शाया गया है – मानव शरीर के अवयव मुख-ब्राह्मण, बाहु-क्षत्रिय, उदर–वैश्य और पैर–शूद्र हैं l प्रत्येक मनुष्य…