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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
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अपना – अपना स्वभाव
अनमोल वचन :-बुढ़ापा सुंदर रूप को, आशा धीरता को, मृत्यु प्राणों को, दोष देखने की आदत धर्माचरण को, क्रोध लक्ष्मी को, नीच पुरुषों की सेवा सत्वभाव को, काम लज्जा को और अभिमान सर्वस्व को नष्ट कर देता है।
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मन का प्रयास
अनमोल वचन :-यह स्थिर न रहने वाला और चंचल मन जिस – जिस शब्दादि विषय के निमित्त से संसार में विचरता है, उस उस विषय से रोककर यानी हटाकर इसे बार – बार परमात्मा में ही निरुद्ध करें।
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विषैला मित्र
अनमोल वचन :-पीठ पीछे कार्य बिगाड़ने वाले और सामने प्रिय वचन बोलने वाले मित्र को त्याग देना चाहिए। वह मित्र विष से भरे उस घड़े के समान है, जिसके केवल ऊपर – ऊपर मुख पर ही थोड़ा सा दूध है।
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4. वैदिक वर्ण व्यवस्था का सत्य
जुलाई 2017 मातृवंदना सामाजिक जन चेतना इस लेख का मुख्य प्रेरणा-स्रोत लाला ज्ञान चंद आर्य द्वारा लिखित “वर्ण व्यवस्था का वैदिक रूप” पुस्तक है l यह पुस्तक उनका अपने आप में एक हृदय स्पर्शी और अनूठा प्रयास है l पुस्तक में दर्शाया गया है – मानव शरीर के अवयव मुख-ब्राह्मण, बाहु-क्षत्रिय, उदर–वैश्य और पैर–शूद्र…
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स्वामी आर्यवेश
अच्छे के साथ अच्छे बनें, बुरे का साथ छोड़ दें, क्योंकि हीरे को हीरे से तराशा तो जा सकता है पर कीचड़ से कीचड़ साफ नहीं किया जा सकता।- स्वामी आर्यवेश
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3. मानव जीवन रहस्य
मातृवंदना जून 2017 ईश्वर की संरचना प्रकृति जितनी आकर्षक है, वह उतनी विचित्र भी है l जड़-चेतन उसके दो रूप हैं l इनमें पाई जाने वाली विभिन्न वस्तुओं और प्राणियों की अपनी-अपनी जातियां हैं l इन जातियों में मात्र मनुष्य ही प्रगतिशील प्राणी है l वह विवेक का स्वामी है l गुरु के सान्निध्य में…
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2. संपूर्ण ग्राम विकास का मूलमन्त्र
मातृवंदना मार्च अप्रैल 2017 हमारा भारत ग्रामों का राष्ट्र है l भारत तब पुनः विश्व शक्ति अथवा विश्वगुरु बन जायेगा, जब देश के समस्त गाँव विकसित हो जायेंगे l देश के हर गाँव में एक चिकित्सालय अवश्य होना चाहिए जिसमें चिकित्सक और चिकित्सा कर्मियों की कोई कमी न हो l हर चिकित्सालय, हर चिकित्सा सुविधा…
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1. परंपरागत शिक्षा-संस्कृति संरक्षण की आवश्यकता
आलेख – शिक्षा व्यवस्था मातृवंदना फरवरी 2017 यह शाश्वत सत्य है कि हम जैसी संगत करते हैं, हमारी वैसी भावना होती है l हमारी जैसी भावना उत्पन्न होती है, हमारा वैसा विचार होता है l हमारा जैसा विचार पैदा होता है, हमसे हमारा वैसा ही कर्म होने लगता है और जब हम जैसा कर्म करते…
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1. मैकाले की सोच का भारतीय शिक्षा-प्रणाली पर कुठाराघात
आलेख शिक्षा दर्पण – पंजाब सौरभ मई 2016 हिमाचल की मासिक पत्रिका “मातृवंदना” अगस्त 2010 में पृष्ठ संख्या 19 पर प्रकाशित आलेख “मैकाले की सोच-1835 ई० में” के अनुसार – यह एक वास्तविक लेख है l इसकी प्रति मद्रास हाईकोर्ट के अभिलेखों से प्राप्त हुई है l ब्रिटिश पार्लियामेंट के रिकार्ड में सुरक्षित है l…