जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

  • महापुरुष

    अनमोल वचन :-जिसके सम्पूर्ण शास्त्र सम्मत कर्म भी बिना कामना और संकल्प के होते हैं तथा जिसके कर्मज्ञान रूपी अग्नि द्वारा भस्मीभूत हो गए हैं, उस महापुरुष को ज्ञानीजन भी पंडित कहते हैं।

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  • शब्द

    अनमोल वचन :-यदि शब्द नामक प्रकाश सम्पूर्ण संसार में व्याप्त न हो तो तीनों लोकों में अंधकार छा जाए।

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  • श्रीकृष्ण जी

    हे  अर्जुन! सज्जन पुरुषों का उद्धार करने के लिए और दूषित कर्म करने वालों का नाश करने के लिए तथा धर्म की स्थापना हेतु मैं (श्रीकृष्ण) युग-युग में प्रकट होता हूं।

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  • संकल्प

    अनमोल वचन :-इच्छा का मूल संकल्प है। संकल्प से ही यज्ञ समुत्पन्न हुए हैं। व्रत-यम-नियम और धर्म ये सब संकल्प से ही उत्पन्न होते हैं। अर्थात इन सब में प्रवुत्ति का आधार संकल्प ही है।

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  • कहा जाता है

    अनमोल वचन :-क्रोध कठिनाई से जीता जाने वाला शत्रु है, लोभ अनंत व्याधि है, सभी प्राणियों के हित में संलग्न मनुष्य साधु है। निर्दयी को असाधु कहा जाता है।

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  • चार बातों से

    अनमोल वचन :-सच्ची विद्या अर्थात् ज्ञान से माया और मोह (अविद्या) का नाश होता है। अच्छे विचारों से संसार का प्रपंच छूटता है। दान देते रहने वाले को दरिद्रता नहीं सताती और सदाचार के पालन से बुराइयां नष्ट हो जाती हैं।

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  • सुख के लिए

    अनमोल वचन :-पहली अवस्था में वह कार्य करे जिससे वृद्ध हो कर सुख पूर्वक रह सके और जीवन प्रयन्त वह कर्म करे जिससे मर कर परलोक में सुखपूर्वक रह सके।

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  • सिंहनी और गधी

    अनमोल वचन :-सिंहनी अपने एकमेव सुपुत्र के बल पर निर्भय होकर आराम से सोती है, जबकि गधी के दस पुत्र होते हुए भी उन्हीं के साथ वह भी भार ढोती रहती है।

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  • शूर व पंडित

    अनमोल वचन :-युद्ध तो पशु-पक्षी भी करते हैं और तोते-सारिकाएं भी पढ़ने का कार्य करते हैं और ज्ञान की बातें बताते हैं अर्थात (तोता रटंत) इसमें कौन सी विशेषता है? जो आदमी धन का दान करता है वही यथार्थ में शूर और वही सच्चे अर्थ में पंडित होता है।

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  • विजय

    अनमोल वचन :-जिस ओर सत्य, धर्म, लज्जा और सरलता है, उसी ओर गोविंद रहते हैं और जहां भगवान श्रीकृष्ण हैं, वहीं विजय है।

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