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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
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हे विष्णु पत्नि!
अनमोल वचन :-“देवी! समुद्र तुम्हारा परिधान है, पर्वत स्तन मण्डल है, जिनका वात्सल्य रस नदियों में प्रवाहित हो रहा है। हे विष्णु पत्नि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं। मेरे पैरों की स्पर्श होने की घृष्टता क्षमा करना”।
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शील के बिना
अनमोल वचन :- “धन और रूप से सम्पन्न होने पर भी शील के बिना मनुष्य, फल और पुष्प युक्त कांटों से भरे हुए वृक्ष की भांति लगता है”।
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उद्यमशील पुरुष –
अनमोल वचन :- उद्यमशील पुरुष के पास दरिद्रता नहीं आती, जप करते रहने से पाप नहीं लगता, मौन रहने से कलह नहीं होती और जागते रहने पर भय नहीं होता।
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इन्सान
इन्सान हूं मैंभेड़िए की खाल पहने हुए हूं, क्यों?बातें धर्म की करता हूं, मैंलहु बे गुनाहों का बहाता हूं, क्यों?करता हूं धर्म नाम पर हिंसाधर्म और पशुता में अन्तर रहा क्यामैं इन्सान कहलाता हूंबन गया पशु, अर्थ रहा क्या?हिंसा तो है धर्म पशु कासबको मरने की राह दिखाई हैहिंसा न कर वास्ता धर्म काचेतन बात…
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आत्मावलोकन
था इन्सान मगर मैनेखुद से खुद वैर किया हैशैतान तो खुद बन बैठा हूंप्रभु को मैंने भुला दिया हैदेखा न कभी मैंने खुद कोपूछता हूं, तू है कौन?जान लूं मैं खुद को पहलेफिर पूछूं, बता तू है कौन?दूसरों का चेहरा दिख जाताअपना कभी दिखता नहींहर दोष दूसरों का दिख जाताअपना एक भी दिखता नहींपहले दूसरों…
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आत्म विस्मरण
सदा चोट खाता हूं मैंबातों में, गैरों की आता हूंमेरे हित की होती हैंबात हितैशी की भूल जाता हूंइन्सान था पर मैंनेखुद से खुद वैर किया हैशैतान बना लिया मैने खुद कोप्रभु को मैंने भुला दिया हैजानता नहीं मैं खुद कोपूछता हूं, तू है कौन?क्या जान लूं? मैं पहले खुद कोफिर पूछूं, बता तू है…
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आत्म विश्वास
विषय वस्तु समझ आ जाएगीलोक-भ्रमण करके देख लेबात ज्ञान-विज्ञान की समझ आएगीसुसंगत करके देख लेविषय-वस्तु का ज्ञान-वर्धन हो जाएगासाहित्य-ग्रंथ पढ़कर देख लेयोग्यता में निखार आ जाएगाकलात्मक शिक्षण-प्रशिक्षण ले कर देख लेसांसारिक ज्ञान मिल जाएगासत्यनिष्ठ रह कर देख लेआत्म ज्ञान-विज्ञान बढ़ जाएगाविरही आंतरिक जिज्ञासा जगा कर देख लेज्ञान-विज्ञान का विस्तार हो जाएगाशैक्षणिक वातावरण बना कर देख…
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आत्म-प्रकाश
मैं क्यों बुद्धि का अंधा हो गया हूं?दो-तीन गुणों का तो मालिक बन गया हूंजो भी मैं बड़ाई प्राप्त करता हूंक्यों उसमें खुद को खुद भूल गया हूंधन्य है कि बड़ाई मेरे पास आती हैपर वह मुझ में विराजित दिव्यांश को जाती हैबस यह धारणा मेरी गलत हो गईराह भी मेरी आगे की आसान हो…
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आत्म-जागरण
पराई आशा पर जीने वाले!पराए प्रकाश पर चलने वाले!पराई मेहनत खाने वाले!रास्ता छोड़ भटकने वाले!मिलेगी तुझे कब तक आस?मिलेगा तुझे कब तक प्रकाश?मिलेगा तुझे कब तक खाना?पड़ेगा तुझे कब तक पछताना?अपने साहस पर तू कर ले आस,अपनी राह पर खुद कर ले प्रकाश,नित अपनी मेहनत का खाया कर,जीवन की सही राह अपनाया कर,पराई आस पर…
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आपत्ति आने के पहले
अनमोल वचन :- # आपत्ति आने के पहले ही उपाय सोचने वाले, समयानुसार बुद्धि से काम लेने वाले ये दोनों ही सुख से रहते हैं, परंतु जो होगा देखा जाएगा-ऐसा सोचने वाला नष्ट हो जाता है।*