जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

  • इन्सान

    इन्सान हूं मैंभेड़िए की खाल पहने हुए हूं, क्यों?बातें धर्म की करता हूं, मैंलहु बे गुनाहों का बहाता हूं, क्यों?करता हूं धर्म नाम पर हिंसाधर्म और पशुता में अन्तर रहा क्यामैं इन्सान कहलाता हूंबन गया पशु, अर्थ रहा क्या?हिंसा तो है धर्म पशु कासबको मरने की राह दिखाई हैहिंसा न कर वास्ता धर्म काचेतन बात…

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  • आत्मावलोकन

    था इन्सान मगर मैनेखुद से खुद वैर किया हैशैतान तो खुद बन बैठा हूंप्रभु को मैंने भुला दिया हैदेखा न कभी मैंने खुद कोपूछता हूं, तू है कौन?जान लूं मैं खुद को पहलेफिर पूछूं, बता तू है कौन?दूसरों का चेहरा दिख जाताअपना कभी दिखता नहींहर दोष दूसरों का दिख जाताअपना एक भी दिखता नहींपहले दूसरों…

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  • आत्म विस्मरण

    सदा चोट खाता हूं मैंबातों में, गैरों की आता हूंमेरे हित की होती हैंबात हितैशी की भूल जाता हूंइन्सान था पर मैंनेखुद से खुद वैर किया हैशैतान बना लिया मैने खुद कोप्रभु को मैंने भुला दिया हैजानता नहीं मैं खुद कोपूछता हूं, तू है कौन?क्या जान लूं? मैं पहले खुद कोफिर पूछूं, बता तू है…

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  • आत्म विश्वास

    विषय वस्तु समझ आ जाएगीलोक-भ्रमण करके देख लेबात ज्ञान-विज्ञान की समझ आएगीसुसंगत करके देख लेविषय-वस्तु का ज्ञान-वर्धन हो जाएगासाहित्य-ग्रंथ पढ़कर देख लेयोग्यता में निखार आ जाएगाकलात्मक शिक्षण-प्रशिक्षण ले कर देख लेसांसारिक ज्ञान मिल जाएगासत्यनिष्ठ रह कर देख लेआत्म ज्ञान-विज्ञान बढ़ जाएगाविरही आंतरिक जिज्ञासा जगा कर देख लेज्ञान-विज्ञान का विस्तार हो जाएगाशैक्षणिक वातावरण बना कर देख…

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  • आत्म-प्रकाश

    मैं क्यों बुद्धि का अंधा हो गया हूं?दो-तीन गुणों का तो मालिक बन गया हूंजो भी मैं बड़ाई प्राप्त करता हूंक्यों उसमें खुद को खुद भूल गया हूंधन्य है कि बड़ाई मेरे पास आती हैपर वह मुझ में विराजित दिव्यांश को जाती हैबस यह धारणा मेरी गलत हो गईराह भी मेरी आगे की आसान हो…

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  • आत्म-जागरण

    पराई आशा पर जीने वाले!पराए प्रकाश पर चलने वाले!पराई मेहनत खाने वाले!रास्ता छोड़ भटकने वाले!मिलेगी तुझे कब तक आस?मिलेगा तुझे कब तक प्रकाश?मिलेगा तुझे कब तक खाना?पड़ेगा तुझे कब तक पछताना?अपने साहस पर तू कर ले आस,अपनी राह पर खुद कर ले प्रकाश,नित अपनी मेहनत का खाया कर,जीवन की सही राह अपनाया कर,पराई आस पर…

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  • आपत्ति आने के पहले

    अनमोल वचन :- # आपत्ति आने के पहले ही उपाय सोचने वाले, समयानुसार बुद्धि से काम लेने वाले ये दोनों ही सुख से रहते हैं, परंतु जो होगा देखा जाएगा-ऐसा सोचने वाला नष्ट हो जाता है।*

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  • एक दूसरे के आश्रय से

    अनमोल वचन :-एक अकेला वृक्ष, बलवान और सुदृढ़ होने पर भी वायु के द्वारा बल पूर्वक जड़ से उखाड़कर फैंका जा सकता है, किंतु जो वृक्ष मिलकर सामूहिक रूप से सुप्रतिष्ठित   रहते हैं वे तीव्र आंधी को एक दुसरे के आश्रय से सह लेते हैं।

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  • हे ईश्वर!

    अनमोल वचन :-हे ईश्वर! सबके विचार, संघटन, मन और चित समान हों। आप ही सबको समान उपदेश देेते हैं और सबको समान भोगाधिकार से युक्त करते हैं।

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  • वर्ण – आश्रम धर्म

    अनमोल वचन :-किसी भी प्राणी की हिंसा न करना – कष्ट न पंहुचाना, मधुर वचन बोलना, सत्य भाषण करना, बाहर और भीतर से पवित्र रहना एवं शौचाचार का पालन करना, दीनों के प्रति दयाभाव रखना तथा क्षमा (निन्दा आदि को सह लेना) ये चारों वर्णों तथा आश्रमों के सामान्य धर्म कहे गए हैं।

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