जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



,

अच्छे व्यवहार की अपेक्षा

29 जनवरी 2026

# जब हम बच्चे को अच्छे संस्कार देते हैं तभी हम उससे अपने लिए अच्छे व्यवहार की अपेक्षा कर सकते हैं l* बच्चा जन्म के समय कोरी स्लेट के समान होता है। उसके मन, सोच और व्यवहार पर सबसे पहला और सबसे गहरा प्रभाव उसके माता-पिता, परिवार और आसपास के वातावरण का पड़ता है। बच्चा वही सीखता है जो वह अपने सामने होते हुए देखता है और जैसा उसे सिखाया जाता है। इसलिए यह कहना बिल्कुल सही है कि यदि हम बच्चे को अच्छे संस्कार देंगे, तभी हम उससे अच्छे व्यवहार की उम्मीद कर सकते हैं।

अच्छे संस्कार केवल उपदेश देने से नहीं आते, बल्कि आचरण, व्यवहार और वातावरण से बनते हैं। जब माता-पिता स्वयं बड़ों का सम्मान करते हैं, सच बोलते हैं, विनम्र भाषा का प्रयोग करते हैं और दूसरों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, तो बच्चा स्वाभाविक रूप से वही गुण अपनाता है। इसके विपरीत, यदि घर में झगड़ा, कठोर भाषा, असम्मान या अनुशासनहीनता हो, तो बच्चा भी वैसा ही व्यवहार करना सीखता है।

बच्चे से यह अपेक्षा करना कि वह हमें सम्मान दे, आज्ञाकारी बने और सभ्य व्यवहार करे, तभी उचित है जब हमने उसे बचपन से ही आदर, प्रेम, धैर्य और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी हो। बिना सही मार्गदर्शन के बच्चे से अच्छा व्यवहार चाहना ऐसा है जैसे बिना बीज बोए फसल की आशा करना।

इसके साथ-साथ बच्चों को केवल सिखाना ही नहीं, बल्कि उन्हें समझना और सही-गलत में अंतर बताना भी आवश्यक है। जब बच्चा गलती करे, तो उसे डाँटने की बजाय प्रेमपूर्वक समझाना चाहिए। इससे बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ता है और वह स्वयं अपने व्यवहार को सुधारने का प्रयास करता है।

आज के समय में जब बच्चे मोबाइल, टीवी और इंटरनेट से भी बहुत कुछ सीखते हैं, तब माता-पिता और शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को सही दिशा दें। अच्छे संस्कार ही अच्छे नागरिक बनाते हैं, और अच्छे नागरिक ही एक स्वस्थ समाज की नींव होते हैं।

अतः यह स्पष्ट है कि बच्चे से अच्छे व्यवहार की अपेक्षा तभी की जा सकती है जब हम उसे बचपन से ही अच्छे संस्कार, सही शिक्षा और सकारात्मक वातावरण प्रदान करें। जैसा हम बच्चे को देंगे, वैसा ही वह हमें लौटाकर देगा।

– संकलित

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *