श्रेणी: हमारा घर-परिवार
-
सन्तान बेटा-बेटी
बेटा-बेटी में भेदभाव — परिवार में बेटे के जन्म पर हर्ष परन्तु बेटी के जन्म पर निराशा क्यों ?- बेटा एक ही परिवार का पालन-पोषण करता है पर बेटी दो परिवारों का ध्यान रखती है, फिर बेटी का जन्म लेने से किसी परिवार का अपमान कैसा ?- बेटा एक परिवार का नाम रोशन करता है…
-
पति-पत्नी
नर – नारी – सृष्टि में तीन तत्व ईश्वर, जीव और प्रकृति प्रमुख हैं । सृष्टि चलाने हेतु जुगल नर – नारी की आवश्यकता होती है । नारी के बिना किसी भी नर के लिए परिवार की कल्पना करना असंभव है । नारी अपने परिवार और समाज के कल्याणार्थ अपना सब कुछ न्योछावर कर देती…
-
श्रेणी: हमारा घर-परिवार
घर
नारी एक – रूप अनेक -माँ, बहन, बहु और बेटी से ही हर घर संवरता है, इन्हें हर परिवार में उचित सम्मान मिलना चाहिए lघर स्वर्ग – धरती पर वह घर स्वर्ग समान है, जहाँ बच्चों को अच्छे संस्कार मिलते हैं lघर तीर्थ – जो सन्तान आज्ञाकारी है, अपने माता-पिता की सेवा करती है, उसे…
-
श्रेणी: हमारा परिवार
परिवार
नारी आभाव -जब कोई दो पहिया वाहन किसी एक पहिये के बिना नहीं चल सकता है तो नारी अभाव में परिवार मात्र नर से कैसे चल सकता है !परिवार –- जिस परिवार में आपसी प्रेम, सोहार्द व् शान्ति नहीं, उस घर की समस्त सुख-सुविधाएं किस काम की l – परिवार एक वह ठोस इकाई है…
-
श्रेणी: एकाकी परिवार
एकाकी परिवार
परंपरागत संयुक्त परिवार से वर्तमान एकाकी परिवार बहुत भिन्न हैं । इनमें मात्र माता – पिता और नौकर – चाकर ही होते हैं । पिता नौकरी करता है और माता घर का सब कार्य करती है या दोनों ही नौकरी करने बहार जाते हैं । अगर वे दोनों नौकरी करते हों तो घर और बच्चे…