जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: जीवन का चहुँमुखी विकास

  • श्रेणी: ,

    शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास

    शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…

    पढ़ें

  • श्रेणी: ,

    शिक्षा से समाज का चहुंमुखी विकास

    शिक्षा मानव जीवन और समाज के विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। यह केवल अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, कौशल, चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करता है। एक शिक्षित समाज ही प्रगतिशील, वैज्ञानिक और समृद्ध समाज बन सकता है। इसलिए शिक्षा को समाज के चहुँमुखी (सर्वांगीण) विकास का प्रमुख साधन…

    पढ़ें

  • श्रेणी:

    शिक्षा

    – गुरु – शिष्य के जिस संयुक्त प्रयास से शिष्य के जीवन का चहुँमुखी अर्थात शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का विकास होता है , शिक्षा कहलाती है l- # हर मंदिर, मठ में वेदाचार्य की नियुक्ति करनी चाहिए जो स्थानीय बालक/बालिकाओं को वैदिक विद्याओं का शिक्षण – प्रशिक्षण दे सकें l*

    पढ़ें

  • श्रेणी: , ,

    1. ज्ञान चालीसा

    दिव्य हिमाचल 19.3.2005 1. लोक भ्रमण करने से विषय वस्तु को भली प्रकार समझा जाता है l 2. साहित्य एवंम सदग्रंथ पढ़ने से विषय वास्तु का बोध होता है l 3. अधिक से अधिक जिज्ञासा रखने से ज्ञान-विज्ञान जाना जाता है l 4. सुसंगत करने से विषयक ज्ञान-विज्ञान का पता चलता है l 5. बड़ों…

    पढ़ें