श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ
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1. जय राष्ट्रीय निशान
मातृवन्दना अगस्त 2007 जय राष्ट्रीय निशानरहे सदा तेरी पहचानकेसरिया वीरता उत्साह त्याग का सूचकआन शान मान का पूजकनहीं था तू अनादर करने के योग्यजलते देखते हैं यहां वहां हमारे प्राणजय राष्ट्रीय निशानश्वेत सत्य पवित्रता शांति का प्रतीकनहीं है आज यहां सब दिखता ठीकगए कहां गुरु देते थे जो हमें सीखकर्तव्य अपना भूल गए होता नहीं…
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3. जनहित विरोधी मानसिकता
25 अगस्त 2007 दैनिक जागरण सामाजिक जन चेतना “भारत देश महान” जैसी बातें अब नीरस और खोखली लगने लगी हैं l मन्दिर समान पवित्र घर और विद्यालयों में जहाँ कभी ज्ञान, श्रद्धा, प्रेम-भक्ति और विश्वास पाया जाता था, वहां पर अज्ञान, अश्रद्धा, अवज्ञा, अविश्वास होने के साथ-साथ अवैध संबंध, भ्रूण हत्याएं, बात-बात पर वाद-विवाद, मार-पीट, मन-मुटाव,…
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2. जय भारत देश महान
आलेख – राष्ट्रीय भावना दैनिक जागरण 18 अगस्त 2007 वह भारत का स्वर्णयुग ही था जब देश का कोई भी नौजवान अपने बल, साहस, सुझबुझ और विद्या-ज्ञान आदि गुणों से सदैव परिपूर्ण रहता था l इसी कारण वह स्थानीय क्षेत्र से बढ़कर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और समस्त विश्व स्तर पर भी पहुँच जाता था l वहां…
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1. आस्था की दहलीज
आलेख – धर्म अध्यात्म संस्कृति दैनिक जागरण 1.8.2007 हमारे देश में ऐसे अनेकों धार्मिक व तीर्थ स्थल हैं जिनके साथ हमारी पवित्र आस्थाएं जुड़ी हुई हैं l हम वहां अपनी किसी न किसी कामना सहित देव दर्शनार्थ जाते हैं और अपनी कामना पूरी होने पर उन्हें श्रद्धा सुमन भी अर्पित करते हैं l इससे हमें…
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19. पानी को बचाएं
दैनिक जागरण 15 जून 2007 पानी लेकर बंद करना है नलभाई यों ही व्यर्थ नहीं बहाना है जलसब्जी या फलों को धोकरक्यारी में डाल देना है पानीक्यारी में नमी रहेगीनाली में नहीं जाने देना है पानीशेष बचा बोतल या बाल्टी का पानीहै क्यारी के पौधों का पानीकल के लिए ढक करआज रखना है पेयजलसंभलकर कल…