जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    1. परंपरागत शिक्षा-संस्कृति संरक्षण की आवश्यकता

    आलेख – शिक्षा व्यवस्था मातृवंदना फरवरी 2017 यह शाश्वत सत्य है कि हम जैसी संगत करते हैं, हमारी वैसी भावना होती है l हमारी जैसी भावना उत्पन्न होती है, हमारा वैसा विचार होता है l हमारा जैसा विचार पैदा होता है, हमसे हमारा वैसा ही कर्म होने लगता है और जब हम जैसा कर्म करते…

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    1. मैकाले की सोच का भारतीय शिक्षा-प्रणाली पर कुठाराघात

    आलेख शिक्षा दर्पण – पंजाब सौरभ मई 2016 हिमाचल की मासिक पत्रिका “मातृवंदना” अगस्त 2010 में पृष्ठ संख्या 19 पर प्रकाशित आलेख “मैकाले की सोच-1835 ई० में” के अनुसार – यह एक वास्तविक लेख है l इसकी प्रति मद्रास हाईकोर्ट के अभिलेखों से प्राप्त हुई है l ब्रिटिश पार्लियामेंट के रिकार्ड में सुरक्षित है l…

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    जो चाहो ले लो

    दुनियां से जो चाहो, तुम ले लोचाहो शूल, तो शूल मिलेंगेचाहो फूल, तो फूल मिलेंगेसूुई चुभाओ, तो शूल लगेंगेफूल बांटो, तो हार पड़ेंगेमुस्कुराहट छीनकर, शूल दर्द देता हैदर्द लेकर, फूल हंसी लौटा देता हैचाहो शूल, तुम शूल ले लोचाहो फूल, तुम फूल ले लोदुनियां से जो चाहो, तुम ले लोचेतन कौशल “नूरपुरी”

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    भूजल स्तर में कैसे होगी वृद्धि?

    भूजल स्तर में आ रही निरंतर गिरावट को जल का सदुपयोग करने से रोका जा सकता है। इससे भूजलस्तर की पुनः वृद्धि हो सकती है इसके लिए हमें आज ही से निरंतर जागरूक रहकर स्वयं कुछ प्रयास करने होंगे।जब भी पानी पीना हो, स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए, पीने के लिए  सदा गहरे हैंडपंप, नलकूप,…

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    सशक्त जनसेवक

    15 अक्तूबर 2015 ब्रह्मभाव में स्थिर रहकर, ब्रह्मतत्व का विश्वकल्याण हेतु प्रचार-प्रसार करने वाला ब्रह्मज्ञानी, ज्ञानवीर होता है।क्षत्रियभाव में स्थिर रहकर, जन, समाज और राष्ट्र हित में जान-माल की रक्षा करने वाला, शूरवीर होता है।वैश्यभाव में स्थिर रहकर, गौसेवा, कृषि और व्यापर से जन, समाज और राष्ट्र हित में कार्य करने वाला, धर्मवीर होता है।शुद्रभाव…

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