जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: अपनी कवितायेँ

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    20. अभाव में

    दैनिक जागरण 3 दिसम्बर 2006 गुण बिना, रूप सुन्दर करना है क्या?विनम्रता बिना, ज्ञान गूढ़ करना है क्या?सदुपयोग बिना, धन अपार करना है क्या?साहस बिना, शस्त्र-अस्त्र अजेय करना है क्या?भूख बिना, भोजन बलवर्धक करना है क्या?होश बिना, साहस अदम्य करना है क्या?परोपकार बिना, बलवान तन करना है क्या?सेवा-त्याग बिना, बसेरा अपनों संग करना है क्या?

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    19. जिन्दगी की राह

    दैनिक जागरण 25 नवंबर 2006अपने ही छूट जाते हैं बहुत दूरछोटी सी जिन्दगी की लम्बी राह परसदा नहीं रहता साथ यहां स्वदेह का भीबस पानी बुलबुला है सत्य की राह परसाथ नहीं देता हर कोई हर कहींहर पल और हर डगर परराह में लगती हैं ठोकरें कदम कदम परचलना पड़ता है अकेला ही संभल करउठता…

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    18. संघर्ष की जिंदगी

    दैनिक जागरण 18 नवंबर 2006है यही तो जिंदगी संघर्ष की है जिंदगीडगमगाना नहीं है प्रण सेविचलित नहीं होना है पथ सेआज का काम करना है आजकल पर नहीं छोड़ना है आजहै यही तो जिंदगी संघर्ष की है जिंदगीजिंदगी अपनी है ही क्याभयभीत रहे मंजिल मिलेगी क्यासामना करना है जीवन संघर्ष सेजीवन संवारना है जीवन संघर्ष…

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    17. शिक्षा – दीक्षा

    दैनिक जागरण 18 नवंबर 2006गधे सा बोझा उठाए हुएदेखो विद्यार्थी विद्यालय जाता हैकिताबी ज्ञान है सारा थैले मेंपढ़कर बाबू बन जाता हैहर साल बाबू ही बाबू बनते रहेंगेअगर देश के नौजवानखाद्यानों का काम चलेगा कैसेमिलेंगे खेतों के कहां से किसानमशीनों का चालक बनेगा कौनकलाओं का विकास करेगा कौनशिक्षा दीक्षा दी जाती है परिश्रम करने के…

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    16. जय भारत के नौजवान

    दैनिक जागरण 29 सितम्बर 2006जय भारत के नौजवानआओ सब मिल कर अपना कर्तव्य निभाएंकरके काम कुछ जग हित खुशहाल कहाएंरश्मी शीतल मिल कर नहाएंदेखे हमें सकल जहानजय भारत के नौजवानप्रतिज्ञा करके जहां भी ने सुखी बाप बनायाशूलों से बिंध कर जो नहीं प्रण से डगमगायाप्राण तज व्रतधारी ने सबको सच्चा मार्ग दिखायाकरके प्रण निभाए भारत…

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