श्रेणी: विविधा
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
कड़वी बात
फूल मुरझा जाते हैं, सदा कलि भी कलि रहती नहीं l घाव भर जाते हैं, पर मनः बात कड़वी मिटती नहीं ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
हृदय की शुद्धि
कह गया कोई संत प्यारा , तू हृदय की शुद्धि कर ले l सदाचार का पालन कर, मनः पहले दोषों से दूरी कर ले l
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श्रेणी: विचारकों के विख्यात कथन
स्वामी विवेकानंद
– “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”- “किसी की निंदा न करें, अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढ़ाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।” – “जिस प्रकार…
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श्रेणी: चेतन विचार
मंदिर
# मंदिर आएं तो भक्त बनकर आएं, पर्यटक बनकर नहीं। मंदिर आस्था केंद्र, पूजा स्थल हैं, कोई पर्यटक स्थल नहीं।*
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श्रेणी: चेतन विचार
समर्थन
# अगर मैं देश सनातन – धर्म, संस्कृति के हित में हूं तभी आप मेरा समर्थन करें अन्यथा नहीं ।*