श्रेणी: मानव-जाति
-
6. दानवता का अहसास
7 दिसम्बर 1996 कश्मीर टाइम्सहिंसा करता मैं धर्म के नाम पर,धर्म पशुता में अंतर रहा क्या?इंसान हूँ कहलाता मैं मगरबन गया पशु, अर्थ रहा क्या?बस एक इंसान हूँ मैं मगरभेड़िये की खाल में रहता क्यों?बातें धर्म की करता मैं मगरलहू बेगुनाहों का बहाता क्यों?हिंसा है धर्म दानव का,सबको मरने की रह दिखाई है,हिंसा करना है…
-
18. आत्म-शान्ति पाने के उपाय
आलेख – कश्मीर टाइम्स 3.12.1996 मानव जीवन में व्यक्ति की ओर से अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने के लिए उचित यह है कि उसके अपने अमूल्य जीवन का कोई ना कोई बड़ा उद्देश्य अवश्य हो l उससे भी अधिक जरुरी है, उसकी ओर से उस उद्देश्य को अपने दायित्व के साथ पूरा करने की चेष्टा…
-
15. सुख – शान्ति कैसे प्राप्त करें
14 नवम्बर 1996 कश्मीर टाइम्सहमारा जीवन जितना अल्पायु का है उससे कई गुणा बढ़कर कामनाओं की उसमें अधिकता रहती है l हमारा मन किसी न किसी इच्छा का शिकार बना रहता है l भले ही वह कोई नर हो या नारी उनके जीवन में कोई न कोई रोग, शोक या व्याधि देखने को अवश्य मिल…
-
14. क्या स्वराज ही लोकराज की इकाई है ?
आलेख – कश्मीर टाइम्स 8.11.1996जब कभी हम एकाकी जीवन में निराशा अनुभव करते हैं तब उस समय हमारी ऐसी भी भावना पैदा हो जाती है कि चलो कहीं किसी सज्जन के पास हो आयें या कहीं किसी रमणीय स्थल पर घूम आयें l यही नहीं हम थोड़ी देर पश्चात् वहां चल भी देते हैं l…
-
13. अपने प्रति अपनी सजगता
आलेख – कश्मीर टाइम्स 21.10.1996 मानव मन जो उसे नीच कर्म करने से रोकता है, विपदा आने से पूर्व सावधान भी करता है, वह स्वयं बड़े रहस्यमय ढंग से एक ऐसे आवरण में छुपा रहता है जिसके चारों ओर विषय, वासना और विकार रूपी एक के पश्चात् एक पहली, दूसरी तीसरी और चौथी परत के…