जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: मानव जीवन के चार आश्रम

  • श्रेणी:

    सन्यास आश्रम

    सत्सनातन धर्म में मनुष्य के आत्म कल्याण हेतु गृहस्थ जीवन त्यागकर, वानप्रस्थ आश्रम या एकांत निवास में रहकर स्व इन्द्रिय शमन और मनो निग्रह करके सन्यास आश्रम में प्रवेश करने का प्राबधान है l

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  • श्रेणी:

    वानप्रस्थ आश्रम

    सत्सनातन धर्म के अनुसार जब घर में पुत्र का पुत्र पैदा हो जाये, तब मनुष्य को 50 वर्ष के पश्चात गृहस्थ जीवन त्यागकर वानप्रस्थ आश्रम या एकांत निवास में प्रवेश कर लेना चाहिए l वह समय मानव जीवन के कल्याणार्थ सर्वश्रेष्ठ माना गया है l

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  • श्रेणी:

    गृहस्थ आश्रम

    सत्सनातन धर्म के अनुसार जितेंद्रिय गुरु – शिष्य द्वारा वेद शास्त्र का संयुक्त पठन – पाठन, शस्त्र – शास्त्रों का शिक्षण – प्रशिक्षण अभ्यास द्वारा शारीरिक, मानसिक, बौध्दिक, और अध्यात्मिक शक्तियां अर्जित करने तथा स्नातक बनने के पश्चात युवा के लिए योग्य वर देखकर शादी करने या गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने का प्रावधान है…

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  • श्रेणी:

    ब्रह्मचर्य आश्रम

    सत्सनातन धर्म के अनुसार जिस आश्रय स्थली से जितेंद्रिय गुरु – शिष्य द्वारा वेद शास्त्र का संयुक्त पठन – पाठन, शस्त्र – शास्त्रों का शिक्षण – प्रशिक्षण अभ्यास के लिए गुरुकुल जाते हैं और उसके पश्चात उनके द्वारा जहाँ लौटकर विश्राम किया जाता है – ब्रह्मचर्य आश्रम कहलाता है l

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  • श्रेणी:

    जीवन के चार आश्रम

    आर्ष दृष्टिकोण से जीवन के चार आश्रम माने गए हैं l ये आश्रम जीवन के समस्त कर्मों को चार वर्गों में विभक्त करते हैं l ऐसा जीवन यापन करने से जीवन की बहुत सी समस्याओं को बड़ी सुगमता से निपटाया जा सकता है l

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