जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: जाग्रति

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    1. चेतना

    दैनिक जागरण 6 जनवरी 2006 सेवा जो कर न सकेवह तन है किस काम कानाम जो जाप न सकेवह मन है किस काम काकार्य जो सिद्ध कर न सकेवह धन है किस काम कासन्मार्ग जो दिखा न सकेवह ज्ञान है किस काम काजीवनरस जो भर न सकेवह धर्म है किस काम कामानवसृजन जो कर न…

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    6. दानवता का अहसास

    7 दिसम्बर 1996 कश्मीर टाइम्सहिंसा करता मैं धर्म के नाम पर,धर्म पशुता में अंतर रहा क्या?इंसान हूँ कहलाता मैं मगरबन गया पशु, अर्थ रहा क्या?बस एक इंसान हूँ मैं मगरभेड़िये की खाल में रहता क्यों?बातें धर्म की करता मैं मगरलहू बेगुनाहों का बहाता क्यों?हिंसा है धर्म दानव का,सबको मरने की रह दिखाई है,हिंसा करना है…

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    13. अपने प्रति अपनी सजगता

    आलेख – कश्मीर टाइम्स 21.10.1996 मानव मन जो उसे नीच कर्म करने से रोकता है, विपदा आने से पूर्व सावधान भी करता है, वह स्वयं बड़े रहस्यमय ढंग से एक ऐसे आवरण में छुपा रहता है जिसके चारों ओर विषय, वासना और विकार रूपी एक के पश्चात् एक पहली, दूसरी तीसरी और चौथी परत के…

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