जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    2. वैदिक वर्ण व्यवस्था का सत्य

    मातृवंदना मई 2010 इस लेख का मुख्य प्रेरणा-स्रोत लाला ज्ञान चंद आर्य द्वारा लिखित “वर्ण व्यवस्था का वैदिक रूप” पुस्तक है l यह पुस्तक उनका अपने आप में एक हृदय स्पर्शी और अनूठा प्रयास है l पुस्तक में दर्शाया गया है – मानव शरीर के अवयव मुख-ब्राह्मण, बाहु-क्षत्रिय, उदर–वैश्य और पैर–शूद्र हैं l प्रत्येक मनुष्य…

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    3. चोर

    21 मार्च 2010 कश्मीर टाइम्सकाला होता है मन मेरा, काला ही सबको कहता हूँ, चोर भाव छुपाता है मन मेरा, चोर ही सबको कहता हूँ, नजर मेरी सबको देखती है, पर खुद को न कभी देख पाई है, ढूंढता हूँ बाहर, छुपाए चोर भीतर, नहीं बात समझ में आई है, चोर हूँ, क्यों न चोरी…

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    2. भटका राही

    कश्मीर टाइम्स 21 फरवरी 2010 भटक गया हूँ, राह से राह मैं अपनी भूलकर सही राह पर, आऊं भी तो कैसे? मैं राह खुद की खुद पहचानकर इच्छा और आशाओं के गहन अंधेरे में खो गया मेरा जीवन है तालाश खुद की, खुद करूँ कैसे? मैं नाहक बन गया दीन हीन हूँ क्या है अच्छा,…

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    1. चैक डैम

    कश्मीर टाइम्स 7 फरवरी 2010 थम जा, ये जल की धारा! छोड़ उतावली, बहे जाती है किधर?मुंह उठा, देख तो जरा, चैक डैम बन गया है इधरतू बाढ़ का भय दिखाना पीछे, पहले गति मंद करले अपनी,तू भूमि कटाव भी करना पीछे, पहले चाल धीमी करले अपनी,यहां रोकना है, थोड़ी देर, रुक सके तो रुक…

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    1. मानवी उर्जा – ब्रह्मचर्य

    जनवरी 2010 मातृवन्दनाविद्यार्थी जीवन को ब्रह्मचर्य जीवन कहा गया है। इस काल में विद्यार्थी गुरु जी के सान्निध्य में रह कर समस्त विद्याओं का सृजन, संवर्धन और संरक्षण करके स्वयं अपार शक्तियों का स्वामी बनता है। सफल विद्यार्थी बनने के लिए विद्यार्थी को ब्रह्मचर्य या मानवी उर्जा का महत्व समझना अति अवष्यक है। ब्रह्मचर्य के…

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