जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: शिक्षा दर्पण

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    3. मैकाले की सोच और भारतीय शिक्षा – प्रणाली

    जुलाई 2011 मातृवंदनाहिमाचल की मासिक पत्रिका मातृवंदना अगस्त 2010 में पृष्ठ संख्या 19 पर प्रकाशित लेख “मैकाले की सोच-1835 ई0 में” के अनुसार यह एक वास्तविक लेख है। इसकी प्रति मद्रास हाईकोर्ट के अभिलेखों से प्राप्त हुई है। ब्रिटिश पार्लियामेंट के रिकाॅर्ड में सुरक्षित है। लाॅर्ड मैकाले को भारत में तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जनरल लाॅर्ड…

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    2. शिक्षा और अध्यात्म ने जोड़ा है बिखरा समाज

    मातृवंदना अप्रैल 2011 सत्य ब्रह्म है और ब्रह्म ही सत्य है l ऐसा वेद कहते हैं l वेद भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के दिव्य आधार स्तंभ रहे हैं जो सदियों से मानव जाति में सत्य, कर्म, धर्म और शौर्यता का संचार करते आये हैं l हमारे पूर्वज आर्य थे l आर्य सत्यप्रिय, कर्मनिष्ठ, धार्मिक और…

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    10. विद्यार्थी जीवन निर्माण

    20 नवम्बर 2007 दैनिक जागरणमानों तो मानव जीवन का निर्माण किसी भवन का निर्माण करने से कोई कम नहीं है। भवन का निर्माण कार्य किसी निश्चित अवधि तक तो समाप्त हो जाता है पर जीवन निर्माण का कार्य बिन रोके लम्बे समय तक चलाए रखने की अपेक्षा बनी रहती है। इसका वर्णन किसी सफल साधक…

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    11. गुरु का महत्व

    15 नवम्बर 2007 दैनिक जागरणभारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। घर पर माता-पिता और विद्यालय में गुरु को उच्च स्थान प्राप्त है। शास्त्रों में इन तीनों को गुरु कहा गया है। मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, गुरु देवो भव। गुरु माता को सर्व प्रथम स्थान प्राप्त है क्योंकि वह बच्चे को नव…

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    8. विद्यार्थी जीवन विकास

    10 अक्तूबर 2007 दैनिक जागरण खरबूजा खरबूजे को देख कर अपना रंग बदलता है – कहावत विश्व विख्यात है। परिवार में बच्चे और विद्यालय में विद्यार्थी आस-पड़ोस में जैसा देखते व सुनते हैं, वे स्वयं वैसा करने का प्रयत्न भी करते हैं। उन्हें वहां उत्तम संस्कार मिलें इसलिए माता-पिता और गुरु जन घर अथवा विद्यालय…

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