जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: विचारकों के विख्यात कथन

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    स्वामी विवेकानंद

    – “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”- “किसी की निंदा न करें, अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढ़ाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।” – “जिस प्रकार…

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    लक्षमण जी

    लक्षमण जी भगवान श्रीराम से कहते हैं – भैया! उत्साह ही बलवान होता है, उत्साह से बढ़कर दूसरा कोई बल नहीं है। उत्साही पुरुष के लिए संसार में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं है।

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    श्रीकृष्ण जी

    हे  अर्जुन! सज्जन पुरुषों का उद्धार करने के लिए और दूषित कर्म करने वालों का नाश करने के लिए तथा धर्म की स्थापना हेतु मैं (श्रीकृष्ण) युग-युग में प्रकट होता हूं।

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    जयशंकर प्रसाद

    पाषाण के भीतर भी मधुर स्रोत होते हैं।, उसमें मदिरा नहीं, शीतल जल की धारा बहती है।

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    स्वामी आर्यवेश

      अच्छे के साथ अच्छे बनें, बुरे का साथ छोड़ दें, क्योंकि हीरे को हीरे से तराशा तो जा सकता है पर कीचड़ से कीचड़ साफ नहीं किया जा सकता।- स्वामी आर्यवेश

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