जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: मानव-जाति

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    आदर्श जीवन की बाधाएं और समाधान

    दिनांक 28 नवंबर 2025 आलेख आदर्श जीवन आदर्श जीवन का अर्थ है ऐसा जीवन जिसे व्यक्ति नैतिकता, संतुलन, आत्म-विकास और समाज में योगदान के आधार पर उत्तम समझे। आदर्श जीवन प्राप्त करना आसान नहीं होता, क्योंकि इसमें कई प्रकार की बाधाएँ आती हैं। साथ ही, उनके समाधान भी हैं। नीचे विस्तार से समझते हैं:आदर्श जीवन…

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    आदर्श जीवन क्या होता है ?

    19 नवंबर 2025 आलेख आदर्श जीवन “आदर्श जीवन” एक सार्वभौमिक सत्य नहीं है, बल्कि व्यक्ति के उद्देश्य, मूल्य, धर्म, समाज और अनुभवों के अनुसार बदलता रहता है। फिर भी, प्राचीन भारतीय ज्ञान (गीता, उपनिषद), आधुनिक मनोविज्ञान और व्यवहारिक जीवनशैली – तीनों के आधार पर हम एक संतुलित, सुंदर और व्यावहारिक “आदर्श जीवन” की संरचना समझ…

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    सनातन धर्म के सोलह संस्कार

    दिनांक 20 जुलाई 2025 सनातन धर्म के सोलह संस्कारसनातन धर्म में मानव जीवन के सोलह संस्कारों का प्रावधान है जो जीवन के समस्त क्रिया-कलापों को दर्शाते हैं, ज्ञान-विज्ञान सम्मत हैं l 1 गर्भादान संस्कार – युवा स्त्री-पुरुष अर्थात पति-पत्नी उत्तम सन्तान प्राप्ति के लिए विशेष तत्परता से प्रसन्नता पूर्वक गर्भादान करें l 2 पुंसवन संस्कार…

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    सन्यास आश्रम

    सत्सनातन धर्म में मनुष्य के आत्म कल्याण हेतु गृहस्थ जीवन त्यागकर, वानप्रस्थ आश्रम या एकांत निवास में रहकर स्व इन्द्रिय शमन और मनो निग्रह करके सन्यास आश्रम में प्रवेश करने का प्राबधान है l

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    वानप्रस्थ आश्रम

    सत्सनातन धर्म के अनुसार जब घर में पुत्र का पुत्र पैदा हो जाये, तब मनुष्य को 50 वर्ष के पश्चात गृहस्थ जीवन त्यागकर वानप्रस्थ आश्रम या एकांत निवास में प्रवेश कर लेना चाहिए l वह समय मानव जीवन के कल्याणार्थ सर्वश्रेष्ठ माना गया है l

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